चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और डीएमके युवा विंग के सचिव उधयनिधि स्टालिन ने अपने हालिया भाषण की कथित भ्रामक कवरेज को लेकर दो राष्ट्रीय टेलीविजन समाचार संस्थानों के खिलाफ ₹100 करोड़ के हर्जाने की मांग करते हुए कानूनी नोटिस जारी किया है। नोटिस में संबंधित चैनलों, उनकी मूल कंपनियों और संबंधित पत्रकारों पर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। साथ ही बिना शर्त सार्वजनिक माफी, विवादित वीडियो हटाने और भविष्य में ऐसे प्रसारण से परहेज करने की मांग की गई है।
6 अगस्त को चेन्नई स्थित एक विधि फर्म के माध्यम से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि 3 अगस्त को दिए गए उनके भाषण को कथित तौर पर संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया और उसके आधार पर प्रसारित वीडियो तथा कार्यक्रमों ने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया। नोटिस के अनुसार, इन प्रसारणों के बाद अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया मंचों ने भी उसी व्याख्या को आगे बढ़ाया, जिससे कथित रूप से भ्रामक धारणा बनी।
कानूनी नोटिस में संबंधित मीडिया संस्थानों से मांग की गई है कि वे अपने टेलीविजन चैनलों पर प्रमुखता से बिना शर्त सार्वजनिक माफी प्रसारित करें और अपने आधिकारिक तथा व्यक्तिगत सोशल मीडिया खातों पर भी उसे प्रकाशित करें। इसके अलावा यूट्यूब सहित सभी आधिकारिक और व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से नोटिस में उल्लेखित वीडियो तत्काल हटाने की मांग की गई है।
नोटिस में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को भविष्य में भी इस प्रकार के आरोपों या संबंधित सामग्री के प्रकाशन एवं प्रसारण से रोकने की मांग की गई है। साथ ही ₹100 करोड़ के हर्जाने की मांग करते हुए कहा गया है कि यदि यह राशि प्राप्त होती है तो उसे मौजूदा कृषि सत्र में कुरुवई फसल की विफलता से प्रभावित किसानों की सहायता के लिए दान कर दिया जाएगा।
नोटिस में संबंधित पक्षों को 48 घंटे के भीतर सभी मांगों का पालन करने के लिए कहा गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब या अनुपालन नहीं मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ उपयुक्त दीवानी और आपराधिक कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी। विवाद मुख्य रूप से 3 और 4 अगस्त को प्रसारित कार्यक्रमों तथा उनसे जुड़े यूट्यूब वीडियो से संबंधित है, जिनके लिंक भी नोटिस में उल्लेखित किए गए हैं। शुक्रवार तक संबंधित मीडिया संस्थानों की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
पूरा विवाद तंजावुर में आयोजित डीएमके के एक सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान दिए गए भाषण से जुड़ा है। यह कार्यक्रम कृषि संकट और कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर आयोजित किया गया था। भाषण के दौरान भीड़ के नारेबाजी करने के बीच उधयनिधि की कुछ टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) की महिला इकाई सहित विभिन्न पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियों में एक लोकप्रिय फिल्म अभिनेता को लेकर दोहरे अर्थ वाले संकेत और महिलाओं की गरिमा का अपमान करने वाली बातें थीं।
इन शिकायतों के आधार पर तंजावुर पूर्व पुलिस ने उधयनिधि स्टालिन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, जिसके बाद डीएमके कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान उनकी कानूनी टीम ने मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया, जहां अदालत ने पूछताछ पूरी होने के बाद स्टेशन बेल पर रिहा करने का निर्देश दिया।
रिहाई के बाद उधयनिधि स्टालिन ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके बयान का उद्देश्य महिलाओं का अपमान करना नहीं था, बल्कि वह केवल कृषि सिंचाई और सरकार की नीतियों से जुड़े मुद्दों पर बोल रहे थे। उनका आरोप है कि उनके भाषण के चुनिंदा और संपादित अंशों को प्रसारित कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। डीएमके का भी दावा है कि भाषण के संपादित वीडियो के आधार पर एक भ्रामक राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया गया। मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर आगे की कार्रवाई पर अब सभी की नजर बनी हुई है।
