नई दिल्ली: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों से जुड़ी साइबर ठगी के मामलों में वापस की गई रकम पिछले तीन वित्त वर्षों में करीब 70 गुना बढ़ गई है। लोकसभा में सोमवार को दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में साइबर ठगी के शिकार ग्राहकों को ₹12.38 लाख लौटाए गए थे, जबकि 2024-25 में यह राशि बढ़कर ₹214.58 लाख और 2025-26 में ₹858.72 लाख हो गई। सरकार के मुताबिक, साइबर अपराधियों के खातों में रकम को समय रहते फ्रीज कराकर उसकी वसूली की गई और फिर संबंधित ग्राहकों को पैसा लौटाया गया।
हालांकि, इसी अवधि में SBI में रिपोर्ट किए गए डिजिटल फ्रॉड मामलों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में बैंक ने 13,319 ऐसे मामले दर्ज किए, जिनमें कुल ₹96.65 करोड़ की रकम शामिल थी। 2024-25 में मामलों की संख्या घटकर 10,465 और रकम ₹67.52 करोड़ रह गई। वित्त वर्ष 2025-26 में केवल 20 मामले दर्ज किए गए, जिनमें ₹3.59 करोड़ की रकम शामिल थी।
मामलों में गिरावट के पीछे बदले नियम
सरकार ने स्पष्ट किया कि 2025-26 में दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों की संख्या में आई तेज गिरावट को डिजिटल ठगी की वास्तविक कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका प्रमुख कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से 15 जुलाई 2024 को लागू किए गए संशोधित फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट नियम हैं।
इन नियमों के तहत बैंक डिजिटल सिस्टम से संबंधित विवादित, संदिग्ध या कथित रूप से धोखाधड़ी वाले लेनदेन को तभी फ्रॉड के रूप में रिपोर्ट करते हैं, जब बैंक की आंतरिक प्रक्रिया में उसे धोखाधड़ी के तौर पर निष्कर्षित किया जाता है। ऐसे में अलग-अलग वर्षों में दर्ज मामलों और लौटाई गई रकम के बीच सीधा संबंध स्थापित करना उचित नहीं होगा।
सरकार ने यह भी बताया कि साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज होने के बाद रकम की रिकवरी और ग्राहक को रिफंड देने की प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं। इसलिए किसी वित्त वर्ष में लौटाई गई रकम उसी वर्ष दर्ज मामलों से संबंधित हो, यह जरूरी नहीं है। इसमें पिछले वर्षों के मामलों से बरामद रकम भी शामिल हो सकती है।
₹858.72 लाख का रिफंड, खातों को फ्रीज कर हुई वसूली
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में SBI ने साइबर ठगी से प्रभावित ग्राहकों को ₹12.38 लाख वापस किए। अगले वित्त वर्ष में यह रकम लगभग 17 गुना बढ़कर ₹214.58 लाख हो गई। 2025-26 में ग्राहकों को ₹858.72 लाख लौटाए गए।
सरकार के मुताबिक, साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज कराने और वहां मौजूद रकम की रिकवरी के जरिए ग्राहकों को पैसा वापस किया गया। यह प्रक्रिया साइबर फ्रॉड के मामलों में शिकायत के बाद तेजी से कार्रवाई और संदिग्ध खातों पर तत्काल रोक लगाने की अहमियत को भी सामने लाती है।
डिजिटल लेनदेन में ग्राहक की देनदारी के नियम
सरकार ने लोकसभा में बताया कि RBI ने अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन से प्रभावित ग्राहकों की देनदारी को लेकर एक व्यवस्था लागू की है। 6 जुलाई 2017 के निर्देशों के तहत ग्राहकों की देनदारी को शून्य देनदारी, सीमित देनदारी और बैंक की बोर्ड-अनुमोदित नीति के अनुसार देनदारी की श्रेणियों में रखा गया है।
बाद में छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के लिए संशोधित मुआवजा व्यवस्था भी लागू की गई। पात्र ग्राहकों के लिए एकमुश्त प्रतिपूर्ति की सुविधा दी गई है। इसके तहत अधिकतम ₹50,000 तक की राशि की प्रतिपूर्ति का प्रावधान है, हालांकि यह ग्राहक के शुद्ध नुकसान के 85 प्रतिशत या ₹25,000, जो भी कम हो, तक सीमित हो सकती है।
साइबर सुरक्षा पर बैंकों की निगरानी
सरकार ने बताया कि RBI ने 18 फरवरी 2021 को डिजिटल पेमेंट सिक्योरिटी कंट्रोल से संबंधित मास्टर डायरेक्शन जारी किया था। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था में सुरक्षा नियंत्रण मजबूत करना है। केंद्रीय बैंक साइबर घटनाओं और बाजार से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर बैंकों को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी सलाह भी जारी करता है।
RBI बैंकों की साइबर सुरक्षा तैयारियों और आईटी ढांचे की जांच के लिए ऑन-साइट आईटी परीक्षण समेत विभिन्न निरीक्षण करता है। सरकार के अनुसार, इन जांचों के आधार पर पिछले तीन वित्त वर्षों में RBI ने अपने साइबर सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन नहीं करने वाले 17 बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है।
रिफंड बढ़ने से रिकवरी व्यवस्था पर जोर
लोकसभा में यह जानकारी SBI खाताधारकों से जुड़े साइबर फ्रॉड, ठगी की रकम की रिकवरी और डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा उपायों से संबंधित सवाल के जवाब में दी गई। आंकड़े बताते हैं कि रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या में बदलाव के बावजूद साइबर ठगी की रकम की रिकवरी और ग्राहकों को वापस भुगतान करने की व्यवस्था पर लगातार जोर बढ़ा है।
हालांकि, 2025-26 में केवल 20 डिजिटल फ्रॉड मामले दर्ज होने का आंकड़ा पुराने वर्षों से सीधे तुलना योग्य नहीं है। संशोधित रिपोर्टिंग व्यवस्था के कारण दर्ज मामलों का दायरा बदल गया है। ऐसे में साइबर ठगी की वास्तविक स्थिति समझने के लिए केवल मामलों की संख्या के बजाय शिकायतों, रोकी गई रकम, बरामदगी और ग्राहकों को किए गए रिफंड समेत कई संकेतकों को साथ देखना जरूरी होगा।
