नई दिल्ली: साइबर ठगों ने अब Google के लोकप्रिय Firebase प्लेटफॉर्म की सुविधाओं का कथित तौर पर इस्तेमाल कर फर्जी वेबसाइट, मैलवेयर और वित्तीय धोखाधड़ी का नया नेटवर्क तैयार किया है। भारत में अधिकारियों की जांच के दौरान कम से कम 57 Firebase-होस्टेड वेबसाइट और डेटाबेस ऐसे पाए गए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर फिशिंग, बैंकिंग जानकारी हासिल करने और दुर्भावनापूर्ण Android ऐप फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसके बाद भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने Google को इन वेबसाइटों और डेटाबेस के खिलाफ कार्रवाई के लिए नोटिस भेजे।
जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने कुछ वेबसाइटों को प्रमुख बैंकों की आधिकारिक वेबसाइट जैसा दिखाने की कोशिश की। इनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI Bank और Axis Bank की कथित नकल करने वाली साइटें शामिल थीं। इन फर्जी पेजों के जरिए लोगों से बैंकिंग यूजरनेम, पासवर्ड, कार्ड की जानकारी और OTP जैसी संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने की कोशिश की जा सकती थी।
एक अन्य कथित साइबर ठगी के तरीके में PM-KISAN जैसी सरकारी योजना का सहारा लिया गया। लोगों को भुगतान, सब्सिडी या योजना का लाभ दिलाने के नाम पर एक Android ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया गया। आरोप है कि ऐप मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद डिवाइस से संवेदनशील जानकारी हासिल कर उसे ठगों के नियंत्रण वाले Firebase डेटाबेस तक भेज सकता था।
क्या है Google Firebase?
Firebase Google का वैध डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है। इसका इस्तेमाल डेवलपर्स मोबाइल ऐप और वेबसाइट बनाने, होस्ट करने और उनके लिए जरूरी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में करते हैं। प्लेटफॉर्म पर डेटाबेस, ऑथेंटिकेशन, एनालिटिक्स, होस्टिंग और अन्य बैकएंड सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यही वजह है कि Firebase का इस्तेमाल बड़ी संख्या में वैध ऐप और वेबसाइटों में होता है। हालांकि, जांच में सामने आए मामलों में आरोप यह है कि साइबर अपराधियों ने इसी वैध तकनीकी ढांचे का इस्तेमाल अपने फर्जी ऑपरेशन को चलाने के लिए किया।
Firebase को अक्सर ‘बैकएंड-एज-ए-सर्विस’ प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका मतलब है कि डेवलपर को ऐप के लिए पूरा सर्वर और बैकएंड सिस्टम खुद तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती। वह प्लेटफॉर्म की तैयार सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकता है। साइबर अपराधियों के लिए भी ऐसी सुविधाएं फर्जी वेबसाइट और ऐप के पीछे डेटा संग्रहण व्यवस्था तैयार करने का जरिया बन सकती हैं।
मुफ्त सुविधाओं का भी फायदा
Firebase की कई सेवाओं में मुफ्त उपयोग के विकल्प उपलब्ध हैं, हालांकि उनकी सीमा सेवा और इस्तेमाल के स्तर पर निर्भर करती है। साइबर अपराधियों के लिए कम लागत वाली ऐसी डिजिटल सुविधाएं आकर्षक हो सकती हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, ठग ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां वेबसाइट होस्टिंग और डेटाबेस जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हों।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधियों की रणनीति अब केवल फर्जी वेबसाइट बनाने तक सीमित नहीं है। वे वैध क्लाउड और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर पूरा फर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी वेबसाइट का किसी बड़े तकनीकी प्लेटफॉर्म पर होस्ट होना उसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट का वास्तविक डोमेन, ऐप का स्रोत और संबंधित संस्था की आधिकारिक जानकारी अलग से सत्यापित करनी चाहिए।
Firebase पर भारत में प्रतिबंध नहीं
भारत की कार्रवाई को Firebase पर पूर्ण प्रतिबंध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अधिकारियों ने केवल उन विशेष वेबसाइटों और डेटाबेस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिनके साइबर अपराध में इस्तेमाल होने का आरोप था। वैध डेवलपर्स और कंपनियां Firebase की सेवाओं का इस्तेमाल करती रह सकती हैं।
Google की नीतियां फिशिंग, मैलवेयर और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए उसकी सेवाओं के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देतीं। कंपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे मामलों की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई करती है।
APK डाउनलोड करने से पहले सावधानी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, WhatsApp, SMS, सोशल मीडिया या अनजान वेबसाइटों से मिले APK और अन्य ऐप डाउनलोड लिंक से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बैंक, सरकारी योजना, रिफंड, सब्सिडी या किसी वित्तीय लाभ के नाम पर ऐप डाउनलोड करने को कहा जाए तो पहले उसकी आधिकारिकता की जांच करनी चाहिए।
किसी संदिग्ध वेबसाइट पर बैंकिंग पासवर्ड, कार्ड नंबर, CVV या OTP दर्ज नहीं करना चाहिए। किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसका स्रोत, डेवलपर और आधिकारिक वेबसाइट से उपलब्धता की पुष्टि करना जरूरी है।
Firebase से जुड़े मामलों ने यह भी दिखाया है कि साइबर ठग अब केवल अपने सर्वर या संदिग्ध डोमेन पर निर्भर नहीं हैं। वे लोकप्रिय और वैध डिजिटल सेवाओं की सुविधाओं का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़े को ज्यादा भरोसेमंद रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में किसी वेबसाइट की तकनीकी पहचान से ज्यादा जरूरी उसके स्रोत और उद्देश्य की स्वतंत्र पुष्टि करना है।
