रायपुर: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में पुलिस ने एक प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ने प्रश्नपत्र वाले लिफाफे की सील खोले बिना एंडोस्कोपिक कैमरे की मदद से उसकी रिकॉर्डिंग कर ली। इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री लिखकर छात्रों तक पहुंचाई गई। मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी प्रोफेसर ने कथित तौर पर 20 अगस्त को होने वाली एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा का प्रश्नपत्र करीब ₹11 हजार में छात्रों तक पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया है कि इससे पहले 8 अगस्त को होने वाली पैथोलॉजी परीक्षा का प्रश्नपत्र भी कुछ खास छात्रों को उपलब्ध कराया गया था। हालांकि, उस समय वह प्रश्नपत्र सार्वजनिक नहीं हुआ था।
जांच के अनुसार, योगेश सोनकेसरिया वर्ष 2019 से भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। पुलिस का कहना है कि 17 अगस्त को वह आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय से अपने घर ले गया था। आरोप है कि घर पहुंचने के बाद उसने लिफाफे की सील को खोले बिना उसमें बेहद छोटा छेद किया और उसके जरिए एंडोस्कोपिक कैमरा अंदर डालकर प्रश्नपत्र का वीडियो बना लिया।
पुलिस के मुताबिक, वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद आरोपी ने प्रश्नपत्र की सामग्री देखकर उसे हाथ से लिखा और संबंधित छात्रों तक पहुंचाया। जांच में अजय नाम के एक छात्र की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि अजय ने प्रश्नपत्र की सामग्री को आगे कई छात्रों तक पहुंचाया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र कितने छात्रों तक पहुंचा और इसके बदले कितनी रकम ली गई।
मामले का खुलासा 20 अगस्त को होने वाली एजीसीएच-221 परीक्षा से कुछ घंटे पहले हुआ। पुलिस के अनुसार, परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल पर प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली थी। इसके बाद विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई।
छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी WhatsApp पर प्रश्नपत्र के कुछ सवाल प्रसारित होने की जानकारी दी। जब अधिकारियों ने उपलब्ध सामग्री की जांच की तो प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका की पुष्टि हुई। इसके बाद वरिष्ठ विज्ञानी एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने प्रोफेसर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ के दौरान पुलिस प्रश्नपत्र हासिल करने, उसकी रिकॉर्डिंग करने, लिखित सामग्री तैयार करने और छात्रों तक पहुंचाने की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रश्नपत्र लीक करने के पीछे केवल आर्थिक लाभ का उद्देश्य था या इसके पीछे छात्रों और अन्य लोगों का कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। आरोपियों के मोबाइल फोन, WhatsApp चैट, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच से इस नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस जांच में पैथोलॉजी के प्रश्नपत्र से जुड़ी कथित गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि 8 अगस्त की परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र किन छात्रों को उपलब्ध कराया गया था और क्या उस मामले में भी किसी तरह का आर्थिक लेनदेन हुआ था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले में छह लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए कहा है कि जांच जारी है और जो भी लोग इसमें संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब फरार दो आरोपियों की तलाश के साथ पूरे पेपर लीक नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर मामले में और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
