कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में करीब ₹1 करोड़ मूल्य की जमीन कथित तौर पर महज ₹18 लाख में अपने करीबी के नाम कराने के मामले में निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) और उनके दो करीबियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी के लिए जबलपुर समेत अन्य शहरों और राजस्थान तक टीमों को भेजा है। मामले में गुरुवार को एफआईआर दर्ज होने के बाद शुक्रवार को संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई थी। जांच अब इस पूरे प्रकरण में कथित तौर पर मदद करने वाले अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तक पहुंच रही है।
मामले में निलंबित CSP और उनके करीबी क्षितिज राज बारापत्रे की ओर से जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दिया गया है। शनिवार को केस डायरी समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब सोमवार को इस पर सुनवाई होने की संभावना है। पुलिस की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
हत्यारोपित से जमीन कराने का आरोप
मामले की जांच में आरोप है कि निलंबित CSP ने एक हत्या के मामले में आरोपित व्यक्ति पर दबाव बनाकर उसकी करीब ₹1 करोड़ कीमत की जमीन अपने करीबी के नाम केवल ₹18 लाख में रजिस्टर्ड कराई। पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि जमीन के सौदे को पूरा कराने के लिए पद और सरकारी संसाधनों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
जांच के अनुसार, हत्यारोपित रमेश लोधी को कथित तौर पर दो दिन तक CSP के सरकारी आवास में रखा गया। इसके बाद उसे सरकारी वाहन से रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया गया, जहां जमीन का पंजीयन कराया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के वास्तविक मूल्य, भुगतान और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।
शिकायत के बाद बढ़ा विवाद
जमीन की रजिस्ट्री के बाद रमेश ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की और पटवारी के समक्ष नामांतरण रोकने के लिए आवेदन दिया। आरोप है कि इसके बाद उस पर दोबारा दबाव बनाया गया और जेल जाने से बचने के लिए ₹75 लाख अतिरिक्त देने की मांग की गई। कथित तौर पर रकम देने से इनकार करने के बाद रमेश और उसके दामाद को एक मामले में जेल भेज दिया गया।
जांच एजेंसियां अब इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही हैं। पुलिस यह भी देख रही है कि जमीन के दस्तावेज तैयार कराने, रजिस्ट्री कराने और बाद में नामांतरण की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
कई पुलिसकर्मी भी जांच के घेरे में
प्रकरण की जांच केवल तीन आरोपियों तक सीमित नहीं है। आरोप है कि कुछ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरे मामले में निलंबित CSP की मदद की। इसी वजह से जांच का दायरा बढ़ाया गया है। संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका, उनके संपर्क और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।
जबलपुर रेंज स्तर पर मामले की जांच एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है। जांच अधिकारी अब उपलब्ध दस्तावेजों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और शिकायतों का मिलान कर रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जमीन के कथित हस्तांतरण के पीछे आर्थिक लाभ किसे मिला।
गिरफ्तारी के लिए कई जगह टीमें
पुलिस ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर टीमें भेजी हैं। जबलपुर और मध्य प्रदेश के अन्य शहरों के अलावा राजस्थान में भी संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। इस बीच अग्रिम जमानत आवेदन पर होने वाली सुनवाई को भी पुलिस कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस जमीन की कीमत, रजिस्ट्री में दर्ज रकम, भुगतान के स्रोत और संबंधित बैंक लेनदेन की जांच कर सकती है। साथ ही सरकारी वाहन और आवास के कथित इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
जांच में सामने आ सकते हैं और नाम
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ना है। यदि दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन या गवाहों के बयान से अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल निलंबित CSP और उनके दो करीबियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
मामले ने पुलिस विभाग में पद के कथित दुरुपयोग और निजी लाभ के लिए सरकारी प्रभाव के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
