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Home»Policy Watch»IRDAI का बीमा कंपनियों पर शिकंजा, Expense Management नियम तोड़ने पर 6 महीने की नई शाखा खोलने पर रोक
Policy Watch

IRDAI का बीमा कंपनियों पर शिकंजा, Expense Management नियम तोड़ने पर 6 महीने की नई शाखा खोलने पर रोक

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksAugust 25, 2026No Comments4 Mins Read
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EoM सीमा से अधिक खर्च करने वाली Edelweiss Life, Pramerica Life, ACKO General और Niva Bupa पर कार्रवाई; नियामक की सख्ती से ऑपरेटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन लागत पर निगरानी बढ़ने के संकेत
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मुंबई: भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों के Expense of Management (EoM) नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया है। नियामक ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में निर्धारित खर्च सीमा से अधिक जाने वाली चार बीमा कंपनियों—Edelweiss Life Insurance, Pramerica Life Insurance, ACKO General Insurance और Niva Bupa Health Insurance—को छह महीने तक नए कारोबार स्थल खोलने से रोक दिया है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि IRDAI अब बीमा कंपनियों की परिचालन और वितरण लागत को निर्धारित सीमा में रखने को लेकर गंभीर है। हालांकि, तत्काल कारोबारी असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि संबंधित कंपनियों के पास पहले से देशभर में स्थापित शाखा और वितरण नेटवर्क मौजूद हैं।

FY25 में 23 कंपनियां EoM सीमा से बाहर

IRDAI की FY25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कुल 23 बीमा कंपनियां निर्धारित EoM सीमा से अधिक खर्च के दायरे में आई थीं और उन्होंने नियामकीय छूट की मांग की थी। इनमें आठ जीवन बीमा कंपनियां और 15 गैर-जीवन बीमा कंपनियां शामिल थीं।

उद्योग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि जो कंपनियां अभी भी निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। नियामक का उद्देश्य कंपनियों को परिचालन और वितरण खर्च नियंत्रित करने के साथ-साथ बीमा कारोबार में अधिक वित्तीय अनुशासन लाने का है।

एक वरिष्ठ निजी क्षेत्र के बीमा अधिकारी के अनुसार, कार्रवाई का संदेश स्पष्ट है कि कंपनियां EoM सीमा को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। निर्धारित सीमा के भीतर खर्च रखने से दावों के लिए अधिक धन उपलब्ध रहने और बीमा उत्पादों को अधिक किफायती बनाने में मदद मिल सकती है।

कमीशन खर्च बना बड़ी चुनौती

बीमा उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, पारंपरिक बीमा कंपनियों के लिए उच्च कमीशन खर्च EoM नियमों के अनुपालन में बड़ी चुनौती है। किसी कंपनी का एक वित्त वर्ष में सीमा के भीतर रहना जरूरी नहीं कि अगले वर्ष भी अनुपालन बना रहे। कमीशन खर्च में उतार-चढ़ाव से कंपनियां निर्धारित सीमा पार कर सकती हैं, खासकर वे कंपनियां जिनका कारोबार मध्यस्थों और कमीशन आधारित वितरण नेटवर्क पर अधिक निर्भर है।

EoM में केवल कमीशन ही शामिल नहीं होता। IT, मानव संसाधन और अन्य परिचालन खर्च भी कुल प्रबंधन व्यय का हिस्सा होते हैं। इन सभी लागतों को नियंत्रित करना कंपनियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

मौजूदा नियमों के तहत बीमा कंपनियों को परिचालन में कुछ लचीलापन दिया गया है, लेकिन कुल प्रबंधन खर्च निर्धारित सीमा के भीतर होना जरूरी है। सामान्य बीमा कंपनियों के लिए यह सीमा सकल लिखित प्रीमियम (GWP) का 30% है, जबकि स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए सीमा 35% तक है। जीवन बीमा कारोबार में विभिन्न उत्पाद श्रेणियों के लिए प्रीमियम के अनुपात में अलग-अलग EoM सीमाएं निर्धारित हैं।

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कार्रवाई का फैसला एक साल से अधिक की प्रक्रिया के बाद

उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा कार्रवाई FY25 के प्रदर्शन से संबंधित है। निर्धारित सीमा से बाहर रहने वाली कंपनियों की समीक्षा की गई और नवंबर-दिसंबर के आसपास सुनवाई हुई। प्रारंभिक समीक्षा में करीब छह महीने लगे। FY25 की समीक्षा 2025 के अंत तक पूरी हुई, जिसके बाद अंतिम निर्णय लेने में छह से आठ महीने और लगे।

इस तरह वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद अंतिम कार्रवाई तक पूरी प्रक्रिया में एक साल से अधिक समय लगा। अधिकारी के मुताबिक, निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करने वाली कंपनियों के लिए नई शाखाएं खोलने की मंजूरी व्यवहारिक रूप से पहले से ही कठिन थी, क्योंकि नए कारोबार स्थल खोलने के लिए नियामकीय अनुमति जरूरी होती है।

Niva Bupa ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह FY26 और FY27 की पहली तिमाही में IRDAI के EoM नियमों के अनुरूप रही है और पूरे वित्त वर्ष के दौरान भी अनुपालन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

लगातार उल्लंघन पर और कड़ी कार्रवाई संभव

IRDAI के EoM दिशानिर्देशों के तहत नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ कई तरह की कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें औपचारिक चेतावनी, छह महीने तक नए कारोबार स्थल खोलने पर रोक, अतिरिक्त खर्च को सीधे शेयरधारकों के लाभ-हानि खाते में डालना और प्रमुख प्रबंधन अधिकारियों के प्रोत्साहन तथा परिवर्तनीय वेतन पर रोक जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

यदि कोई कंपनी लगातार नियमों का उल्लंघन करती है, तो नियामक कुछ विशेष श्रेणियों के कारोबार को लिखने पर भी रोक लगा सकता है। ऐसे में हालिया कार्रवाई को बीमा क्षेत्र में लागत नियंत्रण और नियामकीय अनुपालन को लेकर IRDAI की बढ़ती सख्ती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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