नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने तिरुचिरापल्ली निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया के जरिए प्रतिबंधित संगठनों लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) और तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी (TNLA) की विचारधारा का कथित तौर पर प्रचार करने के मामले में केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री साझा की, जिसमें तमिलनाडु और उत्तरी श्रीलंका को मिलाकर एक ‘संप्रभु तमिल राष्ट्र’ के गठन की कथित मांग की गई थी।
NIA के मुताबिक आरोपी की पहचान थिरुवेरुम्बुर के अगारम नगर निवासी थमिझारासन उर्फ नारायणन के रूप में हुई है। एजेंसी ने 14 अगस्त को उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 13(1)(a) और 13(1)(b) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 152 और 196 के तहत मामला दर्ज किया। यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय के काउंटर टेररिज्म एंड काउंटर रेडिकलाइजेशन (CTCR) डिवीजन के निर्देश के बाद की गई।
मामले की शुरुआत तमिलनाडु पुलिस की थिरुवेरुम्बुर थाना पुलिस द्वारा फरवरी में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी। यह कार्रवाई एक पुलिसकर्मी की शिकायत के आधार पर शुरू हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी Instagram के कई अकाउंट और Facebook पेज संचालित कर रहा था तथा इनके माध्यम से LTTE और TNLA के समर्थन में सामग्री प्रसारित की जा रही थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों संगठन प्रतिबंधित हैं। आरोपी पर कथित तौर पर TNLA को दोबारा सक्रिय करने से जुड़ी अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सोशल मीडिया गतिविधियों के जरिए एक नए संगठन के गठन की बात भी सामने आई थी। इस संगठन का कथित नाम ‘Tamil Nadu Youth Organisation’ रखा गया था।
केंद्र सरकार ने तमिलनाडु पुलिस की प्राथमिकी का संज्ञान लेने के बाद मामले को NIA को सौंपने का फैसला किया। अधिकारियों के मुताबिक, मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि इसमें युवाओं को कथित तौर पर गुमराह करने और अलगाववादी विचारधारा की ओर प्रेरित करने की संभावना भी देखी गई। राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित प्रभाव और व्यापक साजिश के पहलू को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपी गई।
इसके बाद NIA की चेन्नई शाखा में मामला दोबारा दर्ज किया गया। एजेंसी अब आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट, पोस्ट, संपर्कों और कथित ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री का प्रसार कितना व्यापक था और क्या इसमें आरोपी के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे।
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तमिलनाडु पुलिस के शुरुआती रिकॉर्ड में कुछ Instagram अकाउंट की पहचान किए जाने का उल्लेख है। इनमें ‘thamizh_tnlf’, ‘tnyf_trichy’ और ‘Tamilnaduliberation’ जैसे अकाउंट शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा ‘TN Thamizh’ नाम के Facebook पेज का भी प्राथमिकी में उल्लेख किया गया था। एजेंसी इन डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध सामग्री की जांच कर रही है।
प्रारंभिक शिकायत में आरोपी के नाम पर पंजीकृत एक मोटरसाइकिल का भी उल्लेख था। पुलिस के अनुसार, इस वाहन का इस्तेमाल इलाके में कथित तौर पर संबंधित पर्चे वितरित करने के लिए किया गया था। अब जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर चल रही गतिविधियों और जमीन पर कथित प्रचार के बीच किसी संभावित संबंध की पड़ताल कर रही हैं।
मामले में जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि आरोपी की गतिविधियां केवल वैचारिक अभिव्यक्ति तक सीमित थीं या उनका उद्देश्य किसी प्रतिबंधित संगठन की गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए लोगों, खासकर युवाओं को संगठित करना था। NIA डिजिटल साक्ष्यों, सोशल मीडिया गतिविधियों और संभावित संपर्कों की जांच के जरिए इस पहलू को स्पष्ट करने की कोशिश करेगी।
एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि कथित सोशल मीडिया नेटवर्क के पीछे कोई संगठित ढांचा, वित्तीय सहायता या अन्य सहयोग मौजूद था या नहीं। हालांकि, इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही सामने आएगा।
मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान जुटाए जाने वाले डिजिटल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगी। NIA के जांच संभालने के बाद मामले का दायरा स्थानीय सोशल मीडिया गतिविधियों से आगे बढ़कर कथित अलगाववादी नेटवर्क, उसके संपर्कों और प्रतिबंधित संगठनों से संभावित संबंधों तक पहुंच सकता है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।
