काठमांडो/नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। रासुवा जिले के रसुवागढ़ी-टिमुरे क्षेत्र से शुरू हुई बाढ़ का असर नुवाकोट और धादिंग समेत कई जिलों तक पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक कम से कम 95 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ में सड़कें, पुल, वाहन, सीमा व्यापार से जुड़ी सुविधाएं और कई अन्य बुनियादी ढांचे बह गए हैं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची के अनुसार 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय पर्यटक और 37 भारतीय मूल के लोग बताए गए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया और नीदरलैंड के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह शुरुआती सूची है और सत्यापन के बाद आंकड़े बदल सकते हैं।
बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों की चिंता भी बढ़ा दी है। काठमांडो की एक ट्रैवल एजेंसी के मुताबिक, बुधवार को करीब 390 तीर्थयात्रियों को सीमा पार करनी थी। इनमें 93 नेपाली नागरिक शामिल थे। बाढ़ के बाद कई यात्रियों से संपर्क नहीं हो सका। स्थानीय प्रशासन, ट्रैवल एजेंसियां और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में यात्रियों की स्थिति का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
रासुवा जिले में सबसे ज्यादा नुकसान की खबर है। टिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्रों में सीमा शुल्क परिसर में खड़े वाहन और सामान पानी में बह गए। एक नया पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गया। स्याप्रुबेसी, बेत्रावती, मैलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार सहित कई इलाकों में भी बाढ़ का असर देखा गया। धादिंग के गजुरी में भी पुल बहने की सूचना है। चीन के साथ नेपाल के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र की आधारभूत संरचना को भी नुकसान पहुंचा है।
बाढ़ से नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को भी बड़ा झटका लगा है। प्रभावित क्षेत्रों में संचालित या निर्माणाधीन कई परियोजनाओं पर इसका असर पड़ा है। करीब 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित बताई गई हैं। इसके अलावा रासुवा और नुवाकोट में निर्माणाधीन पांच परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इनमें 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना, 78 मेगावाट की संजेन खोला परियोजना और 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए परियोजना शामिल हैं।
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नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान में लगाया गया है। हेलीकॉप्टर, ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है। सेना के अनुसार स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया है। त्रिशूली में आपात चिकित्सा सुविधा भी शुरू की गई है। प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे नहीं जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
नेपाल में संकट के बीच भारत ने भी राहत और बचाव प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर जनहानि पर संवेदना जताई और हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। भारत ने दवाएं, राशन और अन्य जरूरी सामग्री भेजना शुरू किया है। भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमों को भी नेपाल भेजने की तैयारी है।
काठमांडो स्थित भारतीय दूतावास नेपाल सरकार और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और सुरक्षित निकासी के लिए समन्वय किया जा रहा है। भारतीय नागरिकों के लिए +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
नेपाल की बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ा रहा है। त्रिशूली नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में संभावित बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। आशंका है कि पानी आगे गंडक नदी में पहुंच सकता है। बिहार में पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर समेत कई इलाकों में एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
नेपाल के रासुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा समेत कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ की सटीक वजह को लेकर जांच जारी है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने, नदियों से दूर रहने और खतरे वाले क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की अपील की है।
