नई दिल्ली। क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर होने वाली ठगी और साइबर अपराध से जुड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के खिलाफ अमेरिका और ब्रिटेन ने सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने ऐसे घोटाला केंद्रों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई के लिए औपचारिक समझौता किया है, जहां लोगों को क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल निवेश के नाम पर कथित तौर पर ठगा जाता है। दोनों देशों के बीच पहली संयुक्त कार्रवाई अक्टूबर में लंदन में प्रस्तावित है।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 3 सितंबर को अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया स्थित यूएस अटॉर्नी कार्यालय, इंग्लैंड और वेल्स की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस तथा ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी के बीच समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे क्रिप्टोकरेंसी और साइबर माध्यम से होने वाली निवेश धोखाधड़ी में शामिल घोटाला केंद्रों को बाधित करने के उद्देश्य से किया गया पहला अंतरराष्ट्रीय सहयोग समझौता बताया है।
इस समझौते के तहत दोनों देशों की जांच एजेंसियां उन आपराधिक गिरोहों के बारे में सूचनाएं साझा करेंगी, जिनकी गतिविधियां दोनों देशों में फैली हैं। जांचकर्ता समान मामलों और संदिग्धों से जुड़ी खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान करेंगे। साथ ही यह तय करने में भी सहयोग किया जाएगा कि किसी आरोपी के खिलाफ किस देश के अधिकार क्षेत्र में अभियोजन चलाया जाना अधिक उपयुक्त होगा।
अमेरिका में साइबर माध्यम से होने वाली निवेश धोखाधड़ी से होने वाला नुकसान तेजी से बढ़ा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन योजनाओं के कारण लोगों को हर साल करीब 10 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹94,490 करोड़ बैठती है। अमेरिकी न्याय विभाग और एफबीआई के इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, ऐसी धोखाधड़ी से होने वाला दर्ज नुकसान 2023 के 4.57 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 8.65 अरब डॉलर हो गया। यह करीब 89 प्रतिशत की वृद्धि है।
अधिकारियों के अनुसार, 2025 में इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर के पास दर्ज कुल नुकसान में लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा साइबर अपराध से जुड़ी धोखाधड़ी का था। हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े मुख्य रूप से पीड़ितों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों पर आधारित हैं। ठगी की प्रकृति और कई मामलों में शिकायत दर्ज नहीं होने के कारण वास्तविक नुकसान इससे काफी अधिक हो सकता है।
नई साझेदारी के तहत दोनों देशों की एजेंसियां उन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करेंगी, जो घोटाला केंद्रों के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कुछ मामलों में इन केंद्रों को संचालित करने के लिए मानव तस्करी के शिकार लोगों का इस्तेमाल भी किया जाता है। ऐसे केंद्रों में काम करने वाले लोगों से जबरन साइबर ठगी और निवेश धोखाधड़ी कराई जाने के आरोप सामने आते रहे हैं।
पहली संयुक्त कार्रवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में लंदन में प्रस्तावित है। इसमें दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ निजी क्षेत्र की कंपनियां भी शामिल होंगी। इसका उद्देश्य घोटाला केंद्रों से जुड़े नेटवर्क की पहचान, उनके संचालन में बाधा डालना और संबंधित आपराधिक ढांचे के खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाना होगा।
अमेरिका और ब्रिटेन इससे पहले भी अन्य देशों के साथ मिलकर क्रिप्टो ठगी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं। मार्च में अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन अटलांटिक’ के तहत क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े धोखाधड़ी नेटवर्क को निशाना बनाया था। इस अभियान में निवेश ठगी, फिशिंग और डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़ी अन्य धोखाधड़ी में शामिल संगठित आपराधिक गिरोहों पर कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई थी।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के मुताबिक, क्रिप्टो निवेश ठगी में अपराधी अक्सर ऊंचे और तेजी से मुनाफे का लालच देकर पीड़ितों को फर्जी निवेश मंचों या खातों तक पहुंचाते हैं। इसके बाद पीड़ितों से लगातार रकम जमा कराई जाती है और निकासी के समय अतिरिक्त शुल्क या अन्य बहाने बनाकर पैसा रोक दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुफिया जानकारी साझा होने से ऐसे नेटवर्क के उन हिस्सों तक पहुंचना आसान हो सकता है, जो अलग-अलग देशों में बैठकर एक ही आपराधिक गतिविधि संचालित करते हैं।
नई व्यवस्था के तहत अमेरिका और ब्रिटेन अब सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त जांच और प्रवर्तन कार्रवाई के लिए अधिक औपचारिक ढांचे के साथ काम करेंगे। दोनों देशों का लक्ष्य केवल अलग-अलग ठगी के मामलों की जांच करना नहीं, बल्कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उनके संचालन केंद्रों को निशाना बनाना है, जो बड़े पैमाने पर क्रिप्टो और साइबर निवेश धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।
