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Home»क्राइम»फर्जी दस्तावेजों के सहारे ₹5 करोड़ मुआवजा हड़पने की कोशिश, बेंगलुरु में चार पर मुकदमा
क्राइम

फर्जी दस्तावेजों के सहारे ₹5 करोड़ मुआवजा हड़पने की कोशिश, बेंगलुरु में चार पर मुकदमा

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 7, 2026No Comments3 Mins Read
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ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान सामने आया मामला; कथित फर्जी वंशावली, भू-अभिलेख और पहचान पत्रों के जरिए खुद को जमीन का मालिक बताकर मुआवजा मांगने का आरोप
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बेंगलुरु। ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) परियोजना के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के बीच करीब ₹5 करोड़ के मुआवजे को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल करने की कोशिश का मामला सामने आया है। बेंगलुरु दक्षिण जिले की बिदादी पुलिस ने इस मामले में चार लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। आरोप है कि चारों ने अधिग्रहण के दायरे में आने वाली जमीन पर अपना मालिकाना हक साबित करने के लिए जाली दस्तावेज तैयार कर सरकारी मुआवजे पर दावा किया।
मामला उस समय सामने आया जब भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की निगरानी कर रहे अधिकारियों ने मुआवजे के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की जांच शुरू की। दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों के मिलान के दौरान जमीन के स्वामित्व से संबंधित कई विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद अधिकारियों को दावों की सत्यता पर संदेह हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
भूमि अधिग्रहण से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी किशन कलाल ने गुरुवार को चारों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें दीं। बिदादी थाने में दर्ज पहली प्राथमिकी अपराध संख्या 289/2026 में शंकर रेड्डी और कृष्णा रेड्डी को आरोपी बनाया गया है। दूसरी प्राथमिकी अपराध संख्या 290/2026 में एच. वेंकटेश और एच. राजशेखर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पहला मामला अरालालुसंद्रा गांव की सर्वे संख्या 28/5 की 37 गुंटा जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि शंकर रेड्डी और कृष्णा रेड्डी ने खुद को इस जमीन का मालिक बताते हुए सरकारी मुआवजे के लिए आवेदन किया। जांच के दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों में कथित तौर पर गड़बड़ियां पाई गईं।
दूसरा मामला इसी गांव की सर्वे संख्या 43/1 में स्थित एक एकड़ और एक गुंटा जमीन से संबंधित है। आरोप है कि वेंकटेश और राजशेखर ने भी अधिकारियों के समक्ष खुद को जमीन का मालिक बताया और अधिग्रहण के बदले मुआवजे का दावा पेश किया। दस्तावेजों की जांच में उनके दावे पर भी सवाल उठे।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

प्रारंभिक सत्यापन में कथित तौर पर दोनों मामलों में जमा कराए गए भू-अभिलेख और वंशावली भी फर्जी पाए गए। आरोपियों ने ऐसी वंशावली प्रस्तुत की, जिस पर बिदादी के उप तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर होने का दावा किया गया था। इसके अलावा एक ऐसा फोटो भी जमा किया गया, जिस पर ग्राम प्रशासनिक अधिकारी के हस्ताक्षर होने का दावा था। पहचान साबित करने के लिए कथित तौर पर जाली पहचान दस्तावेजों की प्रतियां भी इस्तेमाल की गईं।
अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब GBIT परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। परियोजना के तहत रामनगर और हरहल्ली तालुकों के कई गांवों में करीब 7,800 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने का प्रस्ताव है। इस प्रक्रिया के तहत प्रभावित जमीन के मालिकों को मुआवजा देने का काम भी चल रहा है। इसी दौरान फर्जी दावों के जरिए सरकारी धन हासिल करने की कथित कोशिश ने अधिकारियों की जांच को गंभीर बना दिया है।
पुलिस ने चारों आरोपियों को नोटिस जारी कर उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने और जमीन के स्वामित्व से जुड़े मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज किस तरह तैयार किए गए और क्या इस प्रयास में किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की भी भूमिका थी।
चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और प्रतिरूपण कर धोखाधड़ी करने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस दस्तावेजों की प्रामाणिकता, जमीन के वास्तविक स्वामित्व और मुआवजा दावों से जुड़े पूरे रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच के आधार पर मामले में आगे और कार्रवाई किए जाने की संभावना है।
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