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Home»Policy Watch»प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में जल्द लागू होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और शोध में होगा व्यापक इस्तेमाल
Policy Watch

प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में जल्द लागू होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और शोध में होगा व्यापक इस्तेमाल

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 15, 2026No Comments3 Mins Read
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एआई नीति बनाने और लागू करने के लिए दो समितियों का गठन; 50 साल पुराने विश्वविद्यालयों के दस्तावेज, तस्वीरें और रिकॉर्ड को मल्टीमॉडल डेटा में बदलकर एआई प्रशिक्षण और शोध में किया जाएगा इस्तेमाल
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कानपुर। उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के व्यापक इस्तेमाल की तैयारी है। शिक्षा, शोध, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विश्वविद्यालयों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में एआई तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए एआई पॉलिसी एडवाइजरी कमेटी और एआई पॉलिसी इंप्लीमेंटेशन कमेटी का गठन किया गया है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने रविवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित ‘एआई मंथन-2.0’ के समापन समारोह में यह जानकारी दी।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड भी एआई के लिए महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकते हैं। 50 साल या उससे अधिक पुराने संस्थानों के पास वर्षों से बड़ी मात्रा में शैक्षणिक, शोध और प्रशासनिक डेटा मौजूद है। इस डेटा को व्यवस्थित कर आधुनिक तकनीक के उपयोग योग्य बनाया जाएगा। पुराने लिखित दस्तावेज, तस्वीरों और अन्य रिकॉर्ड को मल्टीमॉडल डेटा में बदलकर एआई मॉडल के प्रशिक्षण और शोध कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
एआई नीति को लेकर गठित सलाहकार समिति में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसमें आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक प्रो. पीपी चक्रवर्ती, बिट्स पिलानी समूह के कुलपति प्रो. वी. रामगोपाल राव, बॉरलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया के डॉ. बीएम प्रसन्ना, एम्स दिल्ली की प्रो. कृथिका रंगराजन और छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक शामिल हैं।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

एआई पॉलिसी इंप्लीमेंटेशन कमेटी को विश्वविद्यालयों में नीति के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है। तकनीकी विश्वविद्यालयों के लिए एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय, चिकित्सा शिक्षा के लिए केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद, कृषि विश्वविद्यालयों के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह और सामान्य विश्वविद्यालयों के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला को जिम्मेदारी दी गई है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह को सदस्य संयोजक बनाया गया है।
राज्यपाल के ओएसडी सुधीर एम. बोबडे ने दोनों समितियों की संरचना और उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नीति तैयार करने के साथ उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि एआई का इस्तेमाल विश्वविद्यालयों की जरूरतों के अनुरूप किया जा सके।
नई व्यवस्था में एआई का उपयोग केवल कक्षाओं और पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय शोध, डेटा प्रबंधन और संस्थागत कार्यप्रणाली में भी बढ़ाने की तैयारी है। विश्वविद्यालयों में मौजूद पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल और संरचित रूप में बदलने से शोधकर्ताओं को ऐतिहासिक डेटा तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। इससे पुराने दस्तावेजों में मौजूद जानकारी का विश्लेषण करने और नए शोध के लिए उसका उपयोग करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
‘एआई मंथन-2.0’ के दौरान विश्वविद्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग, उसके लिए जरूरी नीतिगत ढांचे और उपलब्ध डेटा को उपयोगी संसाधन में बदलने पर चर्चा हुई। सरकार और विश्वविद्यालयों की योजना एआई को उच्च शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाकर शिक्षण, शोध और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक तकनीक आधारित बनाने की है।
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