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Home»Policy Watch»गंभीर ट्रैफिक अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार से अध्यादेश में स्थिति साफ करने को कहा
Policy Watch

गंभीर ट्रैफिक अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार से अध्यादेश में स्थिति साफ करने को कहा

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 16, 2026No Comments3 Mins Read
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गैर-समझौतायोग्य, अनिवार्य सजा वाले और दोहराए गए अपराधों में अभियोजन जारी रखने पर जोर; 2026 के अध्यादेश से पहले खत्म माने जा चुके मामलों की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह अध्यादेश के जरिये स्पष्ट करे कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैर-समझौतायोग्य, अनिवार्य सजा वाले और दोहराए गए अपराधों के मामलों को कभी खत्म नहीं माना गया था। अदालत ने कहा कि इन श्रेणियों में आने वाले मामलों में अभियोजन जारी रहना चाहिए। पीठ ने यह भी पूछा कि 2026 के अध्यादेश से पहले जिन मामलों को खत्म माना जा चुका है, उनकी कानूनी स्थिति क्या होगी।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ उत्तर प्रदेश के 2023 के उस कानून से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें 31 दिसंबर 2021 तक लंबित मोटर वाहन अधिनियम के मुकदमों को खत्म करने का प्रावधान किया गया था। मामला सड़क सुरक्षा से जुड़ी ‘एस राजशेखरन बनाम भारत संघ’ याचिका के संदर्भ में सुनवाई के लिए आया।
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने राज्य सरकार के प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि प्रस्तावित संशोधन कानून की सांविधानिक वैधता से जुड़े सवाल का समाधान नहीं करता। उन्होंने यह भी दलील दी कि राज्य का कानून मोटर वाहन अपराधों से संबंधित केंद्रीय कानून से टकराता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि 2026 में अध्यादेश के माध्यम से तीन श्रेणियों के अपराधों को मामलों को खत्म करने के प्रावधान से बाहर किया गया है। इनमें गैर-समझौतायोग्य अपराध, ऐसे अपराध जिनमें अनिवार्य सजा का प्रावधान है और दोहराए गए अपराध शामिल हैं। राज्य ने यह भी बताया कि इन मामलों की पहचान के लिए जिलों में समितियां गठित की गई हैं और संबंधित मामलों में अभियोजन जारी रहेगा।
इस पर पीठ ने सवाल किया कि जिन मामलों को पहले ही खत्म माना जा चुका है, उनका क्या होगा। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदेश के 75 में से 72 जिलों से ऐसे मामलों से संबंधित जानकारी मिल चुकी है। इसके बाद पीठ ने सुझाव दिया कि नए अध्यादेश में साफ तौर पर लिखा जाए कि इन तीन श्रेणियों में आने वाले मामले कभी खत्म माने ही नहीं गए थे और उनका अभियोजन बहाल किया जाए।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

अदालत ने संकेत दिया कि यदि अध्यादेश के जरिये कानूनी स्थिति को इस तरह स्पष्ट कर दिया जाता है तो कानून की सांविधानिक वैधता से जुड़े व्यापक सवाल पर विचार करने की जरूरत से बचा जा सकता है। पीठ का जोर इस बात पर था कि गंभीर प्रकृति के मोटर वाहन अपराध केवल लंबित मामलों को खत्म करने के प्रावधान के कारण अभियोजन से बाहर न हो जाएं।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रस्तावित संशोधन में गैर-समझौतायोग्य, अनिवार्य सजा वाले और दोहराए गए अपराधों को खत्म किए गए मामलों के दायरे से बाहर रखने की व्यवस्था है। इन मामलों की पहचान के बाद संबंधित अदालतों में अभियोजन की प्रक्रिया जारी रखने का प्रावधान किया जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कानूनी स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्ज करने वाला प्रावधान लाने को कहा। अदालत की टिप्पणी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि गंभीर मोटर वाहन अपराधों के मामलों में केवल लंबित मुकदमों को खत्म करने संबंधी व्यवस्था के कारण अभियोजन समाप्त न हो।
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