Close Menu
Bharat Speaks
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
What's Hot

स्लीपर बस में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान; सुरक्षा पर उठाए सवाल

September 28, 2026

रेड बुल ने एफएसएसएआई के आदेश को हाई कोर्ट में दी चुनौती, ड्रिंक्स से ‘एनर्जी’ शब्द हटाने का मामला

September 28, 2026

एयर इंडिया AI-171 हादसे की अंतिम रिपोर्ट पर पायलट संगठन की तकनीकी भूमिका की मांग, स्वतंत्र समीक्षा में शामिल करने का आग्रह

September 28, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
Bharat Speaks
Subscribe
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
Bharat Speaks
Home»राष्ट्रीय»रेड बुल ने एफएसएसएआई के आदेश को हाई कोर्ट में दी चुनौती, ड्रिंक्स से ‘एनर्जी’ शब्द हटाने का मामला
राष्ट्रीय

रेड बुल ने एफएसएसएआई के आदेश को हाई कोर्ट में दी चुनौती, ड्रिंक्स से ‘एनर्जी’ शब्द हटाने का मामला

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 28, 2026No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter LinkedIn Telegram WhatsApp Email
कंपनी का दावा—आदेश से पहले न शो-कॉज नोटिस मिला, न पक्ष रखने का मौका; एफएसएसएआई ने ‘एनर्जी ड्रिंक’ के बजाय ‘कैफीनयुक्त पेय’ लिखने का सुझाव दिया
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email
नई दिल्ली। रेड बुल ने अपने पेय पदार्थों के लेबल और प्रचार सामग्री से ‘एनर्जी’ शब्द हटाने के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि नियामक ने आदेश जारी करने से पहले उसे कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया और अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एफएसएसएआई से यह जांचने को कहा कि आदेश जारी करने से पहले रेड बुल को कोई नोटिस दिया गया था या नहीं। मामले को आगे की सुनवाई के लिए मंगलवार को सूचीबद्ध किया गया है।
यह विवाद एफएसएसएआई के 1 जुलाई के उस आदेश के बाद सामने आया, जिसमें रेड बुल समेत कई पेय ब्रांडों को अपने उत्पादों के लेबल, विपणन और विज्ञापनों से ‘एनर्जी’ शब्द हटाने का निर्देश दिया गया था। प्रभावित ब्रांडों में स्टिंग, एड्रेनालिन रश, कैंपा गोल्ड बूस्ट, हेल एनर्जी और मॉन्स्टर भी शामिल हैं। नियामक ने कंपनियों को बदलाव लागू करने के लिए 90 दिन की समयसीमा दी थी।
एफएसएसएआई का कहना है कि ‘एनर्जी ड्रिंक’ को अलग खाद्य श्रेणी के तौर पर मान्यता नहीं है, क्योंकि इसके लिए निर्धारित श्रेणी मानक मौजूद नहीं हैं। नियामक ने कुछ ऐसे दावों पर भी चिंता जताई है जिनमें पेय पदार्थों को शरीर और दिमाग को सक्रिय या स्फूर्तिवान बनाने जैसे प्रभावों से जोड़ा जाता है। एफएसएसएआई के अनुसार, इस तरह के दावे उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं।
नियामक ने प्रभावित उत्पादों के लिए ‘कैफीनयुक्त पेय’ नाम इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। हालांकि, पेय उद्योग के प्रतिनिधियों ने इस शब्दावली पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि ‘कैफीनयुक्त पेय’ एक बहुत व्यापक श्रेणी हो सकती है, जिसमें शीतल पेय से लेकर कॉफी तक कई तरह के उत्पाद शामिल हो सकते हैं। उद्योग का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं के लिए उत्पादों की प्रकृति को समझने में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
उद्योग ने एफएसएसएआई के अप्रैल 2024 के एक पुराने संचार का भी हवाला दिया है। उसके अनुसार, उस समय ‘कैफीनयुक्त पेय’ के रूप में लाइसेंस प्राप्त उत्पादों के लिए ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। अब नियामक के नए रुख के बाद कंपनियों के सामने लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में बदलाव करने की स्थिति बन गई है।
कैफीन की मात्रा को लेकर एफएसएसएआई ने वर्ष 2016 में ऐसे पेय पदार्थों के लिए अधिकतम सीमा तय की थी। नियमों के तहत प्रति लीटर पेय में कैफीन की मात्रा 300 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही कंपनियों के लिए उत्पाद के लेबल पर कैफीन की मात्रा स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य किया गया था।
इस मामले में भारतीय पेय उद्योग संघ ने नियामक से कार्रवाई लागू करने से पहले परामर्श और जोखिम-आधारित प्रक्रिया अपनाने की मांग की है। संघ का कहना है कि कंपनियों को किसी भी प्रवर्तन कार्रवाई से पहले अपने तकनीकी और कानूनी पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उद्योग का विरोध मुख्य रूप से उत्पादों की शब्दावली और नियामकीय प्रक्रिया से जुड़ा है।
एफएसएसएआई के निर्देशों का असर कंपनियों की पैकेजिंग और विज्ञापन रणनीति पर भी पड़ा है। कुछ कंपनियों ने नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपने उत्पादों के नाम और प्रचार सामग्री में बदलाव शुरू कर दिए हैं। स्टिंग बनाने वाली कंपनी ने भी कहा है कि वह लागू नियमों के अनुपालन के लिए अपने उत्पाद से ‘एनर्जी’ शब्द हटाने की प्रक्रिया अपना रही है।
रेड बुल की याचिका के बाद विवाद का केंद्र अब दो प्रमुख सवालों पर है। पहला, क्या एफएसएसएआई ने लेबलिंग में बदलाव का निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को उचित प्रक्रिया के तहत नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। दूसरा, प्रभावित पेय पदार्थों को भविष्य में किस श्रेणी और नाम के तहत बाजार में पेश किया जाना चाहिए।
अदालत की अगली सुनवाई में एफएसएसएआई की ओर से नोटिस जारी किए जाने से संबंधित स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद यह तय होगा कि मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही किस दिशा में बढ़ती है। फिलहाल कंपनियों और नियामक के बीच विवाद ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल, उत्पादों की श्रेणी और लेबलिंग प्रक्रिया से जुड़े नियमों पर केंद्रित है।
📲 Join Our WhatsApp Channel
Algoritha Registration
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
Previous Articleएयर इंडिया AI-171 हादसे की अंतिम रिपोर्ट पर पायलट संगठन की तकनीकी भूमिका की मांग, स्वतंत्र समीक्षा में शामिल करने का आग्रह
Next Article स्लीपर बस में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान; सुरक्षा पर उठाए सवाल
Team Bharat Speaks
  • Website

Related Posts

स्लीपर बस में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान; सुरक्षा पर उठाए सवाल

September 28, 2026

भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर पर स्पष्ट किया रुख, फॉर्म-6 और ECINET की होगी समीक्षा

September 26, 2026

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद? 10 महीनों में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने दर्ज कराई आपत्ति

September 23, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Subscribe to Updates

Get the latest sports news from SportsSite about soccer, football and tennis.

Welcome to BharatSpeaks.com, where our mission is to keep you informed about the stories that matter the most. At the heart of our platform is a commitment to delivering verified, unbiased news from across India and beyond.

We're social. Connect with us:

Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
Top Insights
Get Informed

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 Bharat Speaks.
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.