Close Menu
Bharat Speaks
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
What's Hot

88 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को बीमा पॉलिसी बेचना पड़ा भारी, आईआरडीएआई ने कंपनी पर लगाया ₹1 करोड़ का जुर्माना

September 11, 2026

स्वतंत्र निदेशकों की संख्या कम, कोचीन शिपयार्ड पर बीएसई-एनएसई ने लगाया ₹9.66 लाख जुर्माना

September 11, 2026

बैंकों का ₹14,131 करोड़ वापस, लेकिन माल्या को राहत नहीं; ईडी ने कहा—मनी लॉन्ड्रिंग का केस अलग

September 11, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
Bharat Speaks
Subscribe
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
Bharat Speaks
Home»राष्ट्रीय»एआई के पीछे छिपा नया खतरा, जैविक हथियारों से ड्रोन-मिसाइल तक संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा
राष्ट्रीय

एआई के पीछे छिपा नया खतरा, जैविक हथियारों से ड्रोन-मिसाइल तक संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 11, 2026No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter LinkedIn Telegram WhatsApp Email
चिकनगुनिया वायरस में बदलाव से जुड़े शोध में एआई के इस्तेमाल की कोशिश का दावा; चीन, रूस और यमन से जुड़े मामलों में मिसाइल, बम और ड्रोन प्रणालियों के लिए तकनीकी सहायता लेने की कोशिश, कई खाते बंद
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की बढ़ती क्षमताओं ने जहां वैज्ञानिक शोध, चिकित्सा और तकनीकी विकास को नई गति दी है, वहीं इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। हाल में सामने आए मामलों में एआई मॉडल का इस्तेमाल जैविक अनुसंधान, सैन्य तकनीक, मिसाइल प्रणालियों और ड्रोन से जुड़े कामों में करने की कथित कोशिशों का पता चला है। इन घटनाओं ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि अत्याधुनिक एआई को ऐसे क्षेत्रों में किस सीमा तक सहायता देने की अनुमति होनी चाहिए, जहां छोटी सी चूक भी गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है।
एआई कंपनी एंथ्रोपिक के अनुसार, उसके क्लॉड मॉडल से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें उपयोगकर्ताओं ने मॉडल की क्षमताओं का इस्तेमाल संवेदनशील वैज्ञानिक और सैन्य कार्यों के लिए करने की कोशिश की। कंपनी ने संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के बाद संबंधित खातों पर कार्रवाई की और कुछ मामलों में उन्हें स्थायी रूप से बंद कर दिया। संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े इंटरनेट प्रोटोकॉल पतों को भी अवरुद्ध किए जाने की बात कही गई है।
सबसे चिंताजनक मामलों में से एक मई में सामने आया। कंपनी के मुताबिक, एक वैज्ञानिक ने क्लॉड की मदद से चिकनगुनिया वायरस के जीनोम में ऐसे बदलावों से संबंधित जानकारी हासिल करने की कोशिश की, जिनसे वायरस के प्रभाव को अधिक गंभीर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता था। जांच में इस गतिविधि से जुड़े संस्थान की पहचान एक विदेशी सैन्य शोध केंद्र के रूप में होने का दावा किया गया। इसके बाद सुरक्षा प्रणाली ने गतिविधि को संदिग्ध मानते हुए कार्रवाई की।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जैविक अनुसंधान की कई तकनीकें स्वभाव से दोहरे इस्तेमाल वाली होती हैं। किसी वायरस या रोगाणु पर शोध बीमारी को समझने, उपचार विकसित करने और वैक्सीन तैयार करने में मदद कर सकता है। दूसरी ओर, वही वैज्ञानिक जानकारी गलत उद्देश्य से इस्तेमाल होने पर खतरनाक जैविक एजेंटों के विकास में भी सहायक हो सकती है। एआई इस चुनौती को और जटिल बना सकता है, क्योंकि वह जटिल वैज्ञानिक जानकारी को व्यवस्थित करने और शोधकर्ताओं को तेजी से तकनीकी सहायता देने में सक्षम है।
एंथ्रोपिक के खतरा विश्लेषण से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में शुरुआत में यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि एआई से मांगी गई जानकारी सामान्य वैज्ञानिक शोध के लिए है या किसी नुकसान पहुंचाने वाले उद्देश्य से। उपयोगकर्ता सीधे अपने इरादे नहीं बताते और वैज्ञानिक प्रश्न अपने आप में वैध भी हो सकते हैं। इसलिए एआई सुरक्षा प्रणालियों को केवल अलग-अलग प्रश्नों के बजाय उपयोगकर्ता की गतिविधियों के पूरे पैटर्न को समझकर जोखिम का आकलन करना पड़ता है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि उन्नत एआई ऐसे लोगों को जटिल वैज्ञानिक और तकनीकी कामों में सहायता दे सकता है, जिनके पास पहले उस स्तर की विशेषज्ञता उपलब्ध नहीं थी। इससे शोध की गति बढ़ने के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में दुरुपयोग की संभावना भी बढ़ सकती है। जैविक विज्ञान जैसे क्षेत्रों में यही दोहरी क्षमता सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बन रही है।
जैविक हथियारों से आगे बढ़कर सैन्य तकनीक से जुड़े मामलों ने भी चिंता बढ़ाई है। एंथ्रोपिक के अनुसार, चीन से जुड़े तीन मामलों में मिसाइलों, पारंपरिक हथियारों और बमों के डिजाइन से संबंधित सॉफ्टवेयर विकसित करने की कोशिशों का पता चला। इन मामलों में एआई की तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल सैन्य प्रणालियों से संबंधित कार्यों के लिए करने का कथित प्रयास किया गया।
रूस से जुड़े दो मामलों में चुनावी दुष्प्रचार के लिए सामग्री तैयार करने और घातक हथियारों के डिजाइन से जुड़ी गतिविधियों की पहचान किए जाने की बात कही गई है। वहीं यमन में ईरान समर्थित हूती नेटवर्क से जुड़े एक मामले में ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों के लिए सॉफ्टवेयर कोड तैयार कराने की कोशिश का पता चलने का दावा किया गया है।
इन घटनाओं के बाद संबंधित खातों को बंद करने की कार्रवाई की गई। कुछ संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े इंटरनेट प्रोटोकॉल पतों को भी अवरुद्ध किया गया। हालांकि, ऐसे मामलों की पहचान और रोकथाम अपने आप में बड़ी चुनौती है, क्योंकि एआई का उपयोग सामान्य शोध, औद्योगिक विकास और सैन्य क्षेत्र के वैध कार्यों में भी किया जाता है।
हालिया घटनाएं संकेत देती हैं कि एआई सुरक्षा का दायरा केवल साइबर अपराध, फर्जी सामग्री या ऑनलाइन धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह सकता। जैविक विज्ञान, सैन्य तकनीक और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में एआई के इस्तेमाल के लिए मजबूत सुरक्षा नियंत्रण, उपयोगकर्ता सत्यापन और लगातार निगरानी की जरूरत बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई कंपनियों को ऐसी प्रणालियां विकसित करनी होंगी जो संदिग्ध गतिविधियों को शुरुआती स्तर पर पहचान सकें और खतरनाक जानकारी तक पहुंच को रोक सकें। आने वाले समय में एआई की क्षमता जितनी बढ़ेगी, उसके जिम्मेदार और सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
📲 Join Our WhatsApp Channel
Algoritha Registration
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
Previous Articleवैश्विक वित्त में आने वाला है बड़ा बदलाव, नंदन नीलेकणि ने टोकनाइजेशन और ‘फिननेट’ का मॉडल समझाया
Next Article तीन भारतीय आईटी कंपनियों पर हैक-फॉर-हायर का आरोप, अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से मांगी सख्त कार्रवाई
Team Bharat Speaks
  • Website

Related Posts

तीन भारतीय आईटी कंपनियों पर हैक-फॉर-हायर का आरोप, अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से मांगी सख्त कार्रवाई

September 11, 2026

अमेरिका में हुआवे की मुश्किलें बढ़ीं, अदालत में तकनीकी चोरी और ईरान प्रतिबंध उल्लंघन के आरोपों पर सुनवाई शुरू

September 10, 2026

लाल किला ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा, उमर उन नबी को एनआईए ने बताया आतंकी साजिश का मास्टरमाइंड

September 10, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Subscribe to Updates

Get the latest sports news from SportsSite about soccer, football and tennis.

Welcome to BharatSpeaks.com, where our mission is to keep you informed about the stories that matter the most. At the heart of our platform is a commitment to delivering verified, unbiased news from across India and beyond.

We're social. Connect with us:

Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
Top Insights
Get Informed

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 Bharat Speaks.
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.