उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में होमगार्ड भर्ती के नाम पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर ₹70 हजार की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक को बिना किसी परीक्षा और चयन प्रक्रिया के होमगार्ड में नियुक्ति दिलाने का भरोसा दिलाया गया। विश्वास जीतने के लिए आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी होमगार्ड पहचान पत्र, खाकी वर्दी और नेमप्लेट भी उपलब्ध कराई। जब तय तिथि पर नियुक्ति नहीं हुई और युवक ने अधिकारियों से सत्यापन कराया, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित अमन कुमार अंबेडकरनगर जिले के अकबरपुर क्षेत्र स्थित कटरिया याकूबपुर गांव का निवासी है। अमन का आरोप है कि आरोपी ने खुद को प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए भरोसा दिलाया कि उसके माध्यम से बिना लिखित परीक्षा या अन्य चयन प्रक्रिया के होमगार्ड में नौकरी मिल सकती है। आरोपी ने यह भी दावा किया कि भर्ती संबंधी फाइल उच्च स्तर तक भेजी जा चुकी है और नियुक्ति केवल औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिल जाएगी।
पीड़ित के अनुसार, आरोपी ने विश्वास कायम करने के लिए उसे कथित तौर पर होमगार्ड का पहचान पत्र, खाकी वर्दी और नेमप्लेट भी उपलब्ध कराई। इसके अलावा यह कहा गया कि उसकी फाइल डीजीपी कार्यालय तक पहुंच चुकी है और 10 जुलाई को उसकी जॉइनिंग सुनिश्चित कराई जाएगी। इन दावों और दस्तावेजों पर भरोसा करते हुए अमन कुमार ने आरोपी को ₹70 हजार दे दिए।
हालांकि, निर्धारित तिथि पर जॉइनिंग नहीं हुई। आरोपी लगातार अलग-अलग कारण बताकर समय टालता रहा। जब कई दिनों तक नियुक्ति नहीं मिली, तो अमन कुमार को संदेह हुआ। इसके बाद वह अंबेडकरनगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अपने पास मौजूद पहचान पत्र, दस्तावेज तथा अन्य कागजात की जांच कराई। जांच में सामने आया कि प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे और उनका किसी आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं था।
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मामले का खुलासा होने के बाद पीड़ित ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मामला कोतवाली अकबरपुर पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। बताया गया कि आरोपी ने एक सप्ताह के भीतर पूरी रकम लौटाने का आश्वासन दिया, जिसके आधार पर समझौता हुआ। लेकिन तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी पीड़ित को उसकी राशि वापस नहीं मिली।
रकम वापस न मिलने पर पीड़ित ने दोबारा पुलिस से संपर्क किया और कार्रवाई की मांग की। उसका कहना है कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों और सरकारी भर्ती का झूठा दावा कर न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाया, बल्कि सरकारी नौकरी पाने की उसकी उम्मीदों का भी फायदा उठाया। पीड़ित ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र और वर्दी का इस्तेमाल कर स्वयं को अधिकृत व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे पीड़ित को उस पर विश्वास हो गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं इसी तरीके से अन्य लोगों को भी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी तो नहीं की गई। यदि जांच में ऐसे और मामले सामने आते हैं, तो पूरे नेटवर्क की जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) हरेंद्र कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई जा रही है। उपलब्ध दस्तावेजों, कथित पहचान पत्र और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों में भर्ती केवल निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है और किसी भी वैध नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन तथा आधिकारिक नियुक्ति पत्र जैसी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। ऐसे में नौकरी दिलाने के नाम पर धन की मांग करने वाले व्यक्तियों से सतर्क रहना चाहिए। किसी भी भर्ती से संबंधित जानकारी केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना और अधिकृत माध्यमों से ही सत्यापित करनी चाहिए, ताकि इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
