रेस्तरां के बिल में ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना सर्विस चार्ज जोड़ने के मामलों पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने देशभर के 41 रेस्तरां और खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इसी क्रम में Chaayos का संचालन करने वाली सनशाइन टीहाउस प्राइवेट लिमिटेड पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही कंपनी को संबंधित ग्राहक से वसूला गया सर्विस चार्ज लौटाने और अपने सभी आउटलेट्स के बिलिंग सिस्टम में बदलाव करने का निर्देश दिया गया है।
यह कार्रवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर शुरू की गई। शिकायतकर्ताओं ने अपने बिलों की प्रतियां भी उपलब्ध कराईं, जिनकी जांच में पाया गया कि कई रेस्तरां ग्राहकों की पूर्व सहमति के बिना बिल में स्वतः सर्विस चार्ज जोड़ रहे थे। CCPA ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक आचरण (Unfair Trade Practice) माना है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि कोई भी रेस्तरां यह मानकर नहीं चल सकता कि ग्राहक सर्विस चार्ज देने के लिए सहमत है। यदि ग्राहक अच्छी सेवा के बदले स्वेच्छा से टिप देना चाहे तो वह उसका व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन बिल में अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज जोड़कर वसूली नहीं की जा सकती।
Chaayos के मामले में जारी अंतिम आदेश के अनुसार कंपनी को अपने सभी आउटलेट्स के सॉफ्टवेयर और बिलिंग सिस्टम में ऐसे बदलाव करने होंगे, जिससे भविष्य में किसी भी ग्राहक के बिल में सर्विस चार्ज या समान प्रकृति का कोई शुल्क स्वतः न जुड़े। CCPA ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल शुल्क का नाम बदल देने से नियमों से बचा नहीं जा सकता। यदि किसी अतिरिक्त राशि का उद्देश्य सर्विस चार्ज वसूलना है, तो उसे किसी अन्य नाम से जोड़ना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
Chaayos के अलावा जिन प्रतिष्ठानों के खिलाफ अंतिम आदेश जारी किए गए हैं, उनमें कैफे ब्लू बॉटल (पटना), चाइना गेट रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड, बारबेक्यू नेशन हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित फिएस्टा बारबेक्यू, पेबल स्ट्रीट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित फू अहमदाबाद, एल’ओपेरा फ्रेंच बेकरी प्राइवेट लिमिटेड तथा रुद्र हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के जोरो-द लग्जरी नाइट क्लब शामिल हैं। अन्य मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
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सर्विस चार्ज को लेकर जारी विवाद पर दिल्ली हाई कोर्ट भी पहले स्पष्ट रुख अपना चुका है। 28 मार्च 2025 को दिए गए फैसले में अदालत ने CCPA की सर्विस चार्ज संबंधी गाइडलाइंस को वैध माना था और कहा था कि ग्राहकों से अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज वसूलना कानून के अनुरूप नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि CCPA को इन दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए कार्रवाई करने का अधिकार है।
CCPA की 4 जुलाई 2022 की गाइडलाइंस के अनुसार कोई भी होटल या रेस्तरां बिल में स्वतः सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता। इसे किसी अन्य नाम से भी नहीं वसूला जा सकता। ग्राहक को सर्विस चार्ज देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और इसके भुगतान से इनकार करने पर सेवा देने से मना करना या भेदभाव करना भी नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा सर्विस चार्ज को बिल में जोड़कर उस राशि पर GST भी नहीं लगाया जा सकता।
प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि यदि बिल में बिना सहमति सर्विस चार्ज जोड़ा गया हो तो पहले रेस्तरां प्रबंधन से उसे हटाने की मांग करें। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो बिल की प्रति सुरक्षित रखें और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत में बिल, सर्विस चार्ज की राशि, रेस्तरां का विवरण और संबंधित तथ्यों को शामिल करने से कार्रवाई में सहायता मिलती है।
CCPA का कहना है कि यह अभियान केवल कुछ मामलों तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में भी उपभोक्ताओं की शिकायतों के आधार पर जांच जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
