बीजिंग: चीन में तेजी से बढ़ता मैचमेकिंग उद्योग कथित ‘फ्लैश मैरिज’ ठगी को लेकर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कुछ एजेंसियां पुरुषों को जल्द उपयुक्त जीवनसाथी दिलाने का भरोसा देकर बड़ी रकम वसूल रही हैं और बाद में उन्हें धोखे में छोड़ देती हैं। जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच अभियोजन अधिकारियों ने मैचमेकिंग उद्योग से जुड़े अपराधों में 1,546 लोगों के खिलाफ मामलों को संभाला। बढ़ती शिकायतों के बीच अधिकारियों ने ऐसे नेटवर्क के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई भी तेज की है।
37 वर्षीय वांग झुआंग का मामला इस कथित ठगी की तस्वीर सामने लाता है। वांग दक्षिण-पश्चिम चीन के गुइयांग शहर में एक मैचमेकिंग एजेंसी के विज्ञापन देखकर पहुंचा था। विज्ञापनों में शांत स्वभाव, परिवार संभालने वाली और जल्दी शादी के लिए तैयार महिलाओं से परिचय कराने का दावा किया गया था। वांग के मुताबिक, एजेंसी गुइझोउ की महिलाओं को कम खर्च में घर चलाने वाली और पारिवारिक जीवन के लिए उपयुक्त बताती थी।
वांग ने एजेंसी के जरिए कई संभावित दुल्हनों से मुलाकात की। उसकी इच्छा ऐसी महिला से शादी करने की थी, जिसकी पहले शादी न हुई हो, बच्चे न हों और उम्र उससे कुछ कम हो। उसने एक महिला को पसंद किया, जिससे चार-पांच बार मुलाकात हुई। हालांकि, प्रत्येक मुलाकात केवल आठ से 10 मिनट की थी। वांग का कहना है कि एजेंसी ने दोनों को निजी मोबाइल नंबर साझा करने से भी रोक दिया।
शादी के बाद सामने आया कथित अतीत
वांग के अनुसार, उसने शादी के लिए ₹42 लाख से अधिक खर्च किए, जिसमें दुल्हन की कीमत यानी ब्राइड प्राइस भी शामिल था। शादी और अन्य खर्च जोड़ने के बाद उसका कुल खर्च करीब ₹56 लाख से ₹70 लाख तक पहुंच गया।
शादी के कुछ महीनों बाद उसका रिश्ता बिगड़ने लगा। वांग का कहना है कि कर्ज वसूलने वाले लोग उसकी पत्नी पर बकाया रकम को लेकर फोन करने लगे। इसके बाद उसे संदेह हुआ और उसने पत्नी के फोन की जांच की। वहां उसे जन्म प्रमाणपत्र और पिछली शादियों से जुड़े दस्तावेज मिले।
वांग का दावा है कि इसके बाद उसे पता चला कि उसकी पत्नी पहले तीन बार शादी कर चुकी थी और उसके तीन बच्चे थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने अपनी उम्र, स्वास्थ्य संबंधी स्थिति और कर्ज से जुड़ी जानकारी छिपाई थी। दोनों ने तलाक पर सहमति जताई, लेकिन वांग के अनुसार पत्नी ने उसके खर्च किए पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। जब वह मैचमेकिंग एजेंसी के कार्यालय पहुंचा तो उसका दावा है कि कार्यालय बंद था और संचालक गायब हो चुके थे।
वांग का कहना है कि इस घटना ने उसके परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानी में डाल दिया। उसने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा कर अन्य पुरुषों को मैचमेकिंग एजेंसियों के जरिए जल्दबाजी में शादी करने से सावधान करना शुरू किया। उसका कहना है कि कुछ रकम वापस मिली है, लेकिन पूरी राशि की भरपाई नहीं हुई।
128 पीड़ितों से ₹3.5 करोड़ से अधिक की कथित ठगी
इन मामलों की पृष्ठभूमि में चीन का लंबे समय से चला आ रहा लैंगिक असंतुलन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दशकों तक लागू रही एक-संतान नीति और बेटों को प्राथमिकता देने की सामाजिक प्रवृत्ति ने पुरुषों और महिलाओं की संख्या में बड़ा अंतर पैदा किया। चीन में महिलाओं की तुलना में करीब 3 करोड़ अधिक पुरुष होने का अनुमान है। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में यह असंतुलन विवाह के लिए प्रतिस्पर्धा को और बढ़ाता है।
कई क्षेत्रों में पुरुषों से घर, कार और स्थिर आय जैसी आर्थिक अपेक्षाएं भी जुड़ी हैं। पारंपरिक ब्राइड प्राइस की व्यवस्था इस आर्थिक दबाव को और बढ़ा सकती है।
इसी माहौल में कुछ एजेंसियां ‘फ्लैश मैरिज’ का प्रचार कर रही हैं, जिसमें वर्षों तक रिश्ता समझने के बजाय कुछ दिनों में संभावित जीवनसाथी से शादी कराने का दावा किया जाता है। एक प्रचार में कथित तौर पर कहा गया कि सही परिचय के साथ तीन दिन, तीन साल की डेटिंग से बेहतर हो सकते हैं।
गुइयांग इस तरह के मैचमेकिंग कारोबार का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां गुइझोउ की महिलाओं को चीन के दूसरे हिस्सों से आने वाले पुरुषों से मिलाया जाता है, जिनके पास अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक संसाधन हो सकते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर विवाह के विकल्प कम होते हैं।
चीनी अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने चेतावनी दी है कि उद्योग के तेजी से विस्तार से धोखाधड़ी के अवसर भी बढ़े हैं। एक मामले में एक मैचमेकिंग एजेंसी पर कराओके में काम करने वाली महिलाओं का इस्तेमाल कर ग्राहकों को आकर्षित करने और 128 पीड़ितों से ₹3.5 करोड़ से अधिक की ठगी करने का आरोप है।
एक अन्य परिवार ने शादी कराने की कोशिश में करीब ₹70 लाख गंवाने का दावा किया। 59 वर्षीय शू रूलिन अपने बेटे के लिए पत्नी तलाशने गुइयांग पहुंचे थे। उनके अनुसार, बेटे की एक महिला से पहली मुलाकात के सिर्फ सात दिन बाद शादी हो गई। परिवार का आरोप है कि महिला ने बाद में आईफोन, कारोबार के लिए रकम और शादी की पोशाक व आभूषणों के लिए करीब ₹16.8 लाख की मांग की। कथित तौर पर वह दो सप्ताह से भी कम समय परिवार के साथ रहने के बाद चली गई।
कानूनी कार्रवाई में भी कई चुनौतियां
मैचमेकिंग एजेंसियों की पृष्ठभूमि जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक एजेंसी प्रबंधक ने स्वीकार किया कि उसकी कंपनी औपचारिक पृष्ठभूमि जांच नहीं करती थी। इसके बजाय स्थानीय मध्यस्थों पर भरोसा किया जाता था, जिनसे महिलाओं और उनके परिवारों की जानकारी होने की उम्मीद की जाती थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आपराधिक धोखाधड़ी साबित करना मुश्किल हो सकता है। पीड़ितों को यह साबित करना पड़ सकता है कि आरोपी ने शुरुआत से ही उनका पैसा हासिल करने की नीयत से शादी की थी। दूसरी ओर, आरोपी यह दावा कर सकते हैं कि उनका शादी का इरादा वास्तविक था और बाद में रिश्ता खराब हो गया।
वांग का मामला अब भी पूरी तरह सुलझा नहीं है। वह तलाक और अपनी रकम वापस पाने की कोशिश कर रहा है। उसका कहना है कि इस अनुभव ने शादी को लेकर उसका भरोसा बुरी तरह प्रभावित किया है। अब वह दूसरे पुरुषों को सलाह देता है कि मैचमेकिंग एजेंसियों के जरिए शादी करने से पहले संभावित जीवनसाथी की पृष्ठभूमि और आर्थिक स्थिति की पूरी जांच जरूर करें।
