नई दिल्ली: चीन ने मेडिकल इंश्योरेंस फ्रॉड और दवा आपूर्ति श्रृंखला (Pharmaceutical Supply Chain) में कथित अनियमितताओं पर व्यापक कार्रवाई तेज करते हुए इनर मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र और शांक्सी प्रांत में अस्पतालों तथा दवा थोक विक्रेताओं के खिलाफ समन्वित निरीक्षण अभियान शुरू किया है। चीन के नेशनल मेडिकल प्रोडक्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन (NMPA) और नेशनल हेल्थकेयर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (NHSA) द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य दवाओं के ट्रेसेबिलिटी रिकॉर्ड में अनियमितताओं, फर्जी मेडिकल इंश्योरेंस दावों तथा डुप्लीकेट रिइम्बर्समेंट (Reimbursement) मामलों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करना है।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई दवा ट्रेसेबिलिटी कोड की एल्गोरिदमिक स्क्रीनिंग के दौरान सामने आए संदिग्ध मामलों के आधार पर शुरू की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि कहीं दवाओं की खरीद, वितरण और मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया में फर्जी रिकॉर्ड, दोहराए गए भुगतान दावे या अन्य वित्तीय अनियमितताएं तो नहीं हुईं। यदि जांच में उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित संस्थानों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
शांक्सी प्रांत का चयन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां पहले भी बड़े मेडिकल इंश्योरेंस फ्रॉड के मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2025 में दातोंग स्थित एक निजी अस्पताल के पूर्व नियंत्रक को गैर-जरूरी भर्ती, दवाओं की कीमत बढ़ाकर दिखाने, फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करने और बेड ऑक्यूपेंसी रिपोर्ट में हेरफेर कर राष्ट्रीय मेडिकल इंश्योरेंस फंड से RMB 9.7 मिलियन से अधिक की धोखाधड़ी करने के मामले में 13 वर्ष 6 माह के कारावास की सजा सुनाई गई थी।
वहीं इनर मंगोलिया को ऐसे क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है जहां विभिन्न क्षेत्रों की अलग-अलग मेडिकल इंश्योरेंस प्रतिपूर्ति नीतियों के कारण दवा आर्बिट्राज (Drug Arbitrage) और समानांतर आपूर्ति श्रृंखला (Parallel Supply Chain) जैसी गतिविधियों का जोखिम अधिक रहता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कम कीमत पर खरीदी गई दवाओं को अन्य क्षेत्रों में अधिक कीमत पर बेचकर अवैध लाभ कमाने की प्रवृत्ति न केवल मेडिकल इंश्योरेंस फंड को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि दवाओं की प्रामाणिकता और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती है।
चीन के सर्वोच्च जन न्यायालय (Supreme People’s Court) ने मेडिकल इंश्योरेंस फंड को नागरिकों की “जीवनरक्षक निधि” बताते हुए स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली की स्थिरता पर सीधा प्रभाव डालती है। न्यायालय ने कहा है कि मेडिकल इंश्योरेंस फंड से अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में NHSA और पुलिस ने संयुक्त रूप से 3,776 मामलों की जांच की, जिनमें 10,357 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया तथा 1,626 संस्थाओं को धोखाधड़ी में शामिल पाया गया। इस दौरान लगभग RMB 34.2 बिलियन (करीब ₹40,000 करोड़) की राशि बरामद की गई। इससे पहले वर्ष 2024 में लगभग US$3.9 बिलियन की रिकवरी हुई थी, जबकि आपराधिक धोखाधड़ी मामलों में वर्ष-दर-वर्ष 131.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
वर्ष 2026 से लागू नए नियामकीय ढांचे ने प्रवर्तन को और कठोर बना दिया है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी नियमों के तहत यदि मेडिकल इंश्योरेंस प्राधिकरणों को निर्धारित श्रेणी की धोखाधड़ी का पता चलता है तो उन्हें संबंधित मामलों को अनिवार्य रूप से सार्वजनिक सुरक्षा एजेंसियों (पुलिस) को आपराधिक जांच के लिए भेजना होगा। इससे पहले कई मामलों में केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक ही सीमित रहने वाली प्रक्रिया अब सीधे आपराधिक मुकदमों तक पहुंच सकती है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी और डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते उपयोग से मेडिकल इंश्योरेंस फ्रॉड की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी हो गई है। उन्होंने कहा कि दवा आपूर्ति श्रृंखला, अस्पतालों, बीमा कंपनियों और सरकारी स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच डिजिटल डेटा का सुरक्षित एकीकरण, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, फोरेंसिक ऑडिट और मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था ऐसे वित्तीय अपराधों की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान निरीक्षण अभियान जारी रहेगा और जांच के दौरान प्राप्त डिजिटल रिकॉर्ड, ट्रेसेबिलिटी डेटा तथा वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक एवं आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वर्ष 2026 के दूसरे चरण का राष्ट्रीय प्रवर्तन अभियान सितंबर से नवंबर के बीच संचालित किया जाएगा, जिसमें मेडिकल इंश्योरेंस और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की व्यापक निगरानी जारी रहेगी।
