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Home»Health»महाराष्ट्र में एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर 6 माह तक की जेल और ₹1 लाख जुर्माने का प्रावधान
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महाराष्ट्र में एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर 6 माह तक की जेल और ₹1 लाख जुर्माने का प्रावधान

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksAugust 5, 2026No Comments4 Mins Read
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उपभोक्ताओं को भ्रामक खाद्य उत्पादों से बचाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला; निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर लगी रोक, नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ अभियान तेज
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मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य में एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा जारी आदेश के बाद महाराष्ट्र ऐसा कदम उठाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य ऐसे उत्पादों पर रोक लगाना है जिन्हें पारंपरिक डेयरी पनीर के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया जाता है, जबकि उनका निर्माण दूध के बजाय अन्य गैर-डेयरी सामग्री से किया जाता है।

खाद्य सुरक्षा आयुक्त के आदेश के अनुसार, राज्य में अब किसी भी व्यक्ति या संस्था को एनालॉग पनीर का उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण या बिक्री करने की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से ऐसे उत्पादों को उचित लेबलिंग या स्पष्ट जानकारी के बिना सामान्य पनीर के रूप में बेचे जाने की शिकायतें मिल रही थीं, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो रहे थे और खाद्य गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो रही थीं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की कैद और ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि असुरक्षित खाद्य पदार्थ के सेवन से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत दोषियों को आजीवन कारावास तथा कम से कम ₹10 लाख के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

अधिकारियों के अनुसार, एनालॉग पनीर पारंपरिक डेयरी पनीर से अलग होता है। इसे सामान्यतः दूध की वसा के स्थान पर वनस्पति वसा, पाम ऑयल तथा अन्य गैर-डेयरी सामग्री का उपयोग कर तैयार किया जाता है। देखने और बनावट में यह सामान्य पनीर जैसा दिखाई देता है, जिससे उपभोक्ता आसानी से भ्रमित हो सकते हैं। सरकार का कहना है कि बिना स्पष्ट लेबलिंग के ऐसे उत्पादों की बिक्री उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार और खाद्य पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।

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राज्य सरकार के अनुसार, पिछले कुछ समय से नकली और मिलावटी डेयरी उत्पादों को लेकर जनप्रतिनिधियों तथा उपभोक्ता संगठनों की ओर से लगातार चिंता व्यक्त की जा रही थी। पिछले वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया गया था और एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। इसके बाद व्यापक समीक्षा के उपरांत 30 जुलाई को आदेश जारी किया गया, जिसे अब पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।

प्रतिबंध के साथ-साथ महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ अपना अभियान भी तेज कर दिया है। मई से राज्यभर में संदिग्ध सिंथेटिक दूध और कथित नकली पनीर बनाने वाली इकाइयों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। हाल ही में पुणे के मांजरी खुर्द स्थित एक गोदाम पर की गई कार्रवाई में लगभग 1,400 किलोग्राम कथित नकली पनीर जब्त किया गया। इसके अतिरिक्त 1,800 किलोग्राम स्किम्ड मिल्क पाउडर, 400 किलोग्राम ग्लिसरॉल मोनोस्टियरेट (जीएमएस) पाउडर, 718 लीटर पाम ऑयल तथा अन्य कच्ची सामग्री भी बरामद की गई, जिनका उपयोग कथित तौर पर गैर-डेयरी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य उत्पादों में पारदर्शी लेबलिंग और गुणवत्ता मानकों का पालन उपभोक्ता सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। उनका मानना है कि डेयरी और गैर-डेयरी उत्पादों के बीच स्पष्ट अंतर दर्शाने से उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिलेगी और भ्रामक विपणन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। नियमित निरीक्षण, प्रयोगशाला परीक्षण और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी से मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि नकली पनीर के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान व्यापक खाद्य सुरक्षा अभियान का हिस्सा है। इसके तहत मुंबई सहित राज्य के विभिन्न शहरों में होटल, रेस्तरां, डेयरी प्रतिष्ठानों और अन्य खाद्य कारोबारियों के यहां स्वच्छता, खाद्य गुणवत्ता और नियामकीय अनुपालन की नियमित जांच की जा रही है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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