नई दिल्ली: इटली के मिलान के अभियोजकों ने देश की शीर्ष फुटबॉल लीगों सीरी ए और सीरी बी के पूर्व रेफरी नियुक्ति प्रमुख जियानलुका रोक्की के खिलाफ खेल धोखाधड़ी (स्पोर्ट्स फ्रॉड) के मामले को बंद करने की सिफारिश की है। करीब दो वर्ष तक चली जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने निष्कर्ष निकाला कि रेफरी नियुक्तियों में मैच फिक्सिंग या किसी सुनियोजित हेरफेर का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
रोक्की, जो इटली की शीर्ष दो पेशेवर फुटबॉल लीगों के लिए रेफरी नियुक्त करने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, पर चार मैचों में रेफरी नियुक्ति को लेकर खेल धोखाधड़ी में कथित मिलीभगत का संदेह था। जांच के दायरे में शामिल मुकाबलों में हाल ही में समाप्त हुए सीरी ए सत्र का टोरिनो और इंटर मिलान के बीच खेला गया मैच भी शामिल था।
मामले की जांच शुरू होने के बाद अप्रैल में रोक्की ने अपने पद से स्वयं को अलग कर लिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि वह चाहते हैं कि कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और उन्हें विश्वास है कि जांच के अंत में उनका नाम पूरी तरह साफ हो जाएगा।
इतालवी समाचार एजेंसी ANSA के अनुसार, मिलान अभियोजकों ने दो वर्ष की जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, संचार रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि रेफरी नियुक्तियों को प्रभावित करने या मैचों के परिणामों पर असर डालने के उद्देश्य से किसी संगठित प्रणाली के तहत कार्य किया गया था।
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हालांकि अभियोजकों ने आपराधिक मामले को समाप्त करने की सिफारिश की है, लेकिन जांच से संबंधित दस्तावेज खेल न्यायिक प्राधिकरणों और इटली की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (CONI) के जनरल प्रॉसिक्यूटर कार्यालय को भेज दिए गए हैं। ये संस्थाएं अब यह मूल्यांकन करेंगी कि मामले में किसी प्रकार के अनुशासनात्मक नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
इसका अर्थ है कि रोक्की के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की संभावना भले ही समाप्त होती दिखाई दे रही हो, लेकिन खेल प्रशासन के नियमों के तहत अलग से अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा अभी भी जारी रह सकती है।
यह मामला इटली के फुटबॉल प्रशासन में पारदर्शिता और रेफरी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच सामने आया था। जांच एजेंसियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि क्या कुछ विशेष मैचों में रेफरी चयन को प्रभावित कर प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता से समझौता किया गया था। हालांकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजकों ने किसी संगठित मैच फिक्सिंग या रेफरी नियुक्ति में आपराधिक षड्यंत्र की पुष्टि नहीं की।
अब अंतिम निर्णय अदालत द्वारा अभियोजकों की सिफारिश पर विचार करने के बाद लिया जाएगा। दूसरी ओर, खेल न्यायिक संस्थाएं अपने स्तर पर मामले की समीक्षा जारी रखेंगी और यदि उन्हें खेल आचार संहिता के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं तो वे संबंधित नियमों के तहत अलग कार्रवाई कर सकती हैं। फिलहाल उपलब्ध जांच निष्कर्षों के अनुसार, रोक्की के खिलाफ मैच फिक्सिंग या खेल धोखाधड़ी का कोई आपराधिक प्रमाण स्थापित नहीं हो सका है।
