गाजियाबाद: विदेशी संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और वास्तविक आय की जानकारी छिपाकर आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वाले करदाताओं के खिलाफ आयकर विभाग ने जांच तेज कर दी है। फाइनेंशियल एसेट्स इंटेलिजेंस यूनिट (एफएआईयू) की रिपोर्ट के आधार पर गाजियाबाद में 150 से अधिक ऐसे करदाताओं की पहचान की गई है, जिनके आयकर रिटर्न में विदेशी परिसंपत्तियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी अधूरी या संदिग्ध पाई गई है। जांच के दायरे में रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े कुछ बिल्डर और बड़े कारोबारी भी बताए जा रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध मामलों की पहचान केवल आयकर रिटर्न के आधार पर नहीं की गई है, बल्कि बैंकिंग रिकॉर्ड, विदेशी वित्तीय सूचनाओं, विभिन्न सरकारी एजेंसियों से प्राप्त जानकारी और डेटा एनालिटिक्स के जरिए तथ्यों का मिलान किया जा रहा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी करदाता ने जानबूझकर विदेशी संपत्ति या आय छिपाई है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आयकर विभाग ने जांच के लिए आधुनिक तकनीकों का भी व्यापक उपयोग शुरू कर दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स और अंतरराष्ट्रीय सूचना साझाकरण व्यवस्था के माध्यम से विदेशों में मौजूद बैंक खातों, निवेश, कंपनियों और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों का मिलान कर संदिग्ध मामलों की पहचान की जा रही है। इससे उन करदाताओं को चिन्हित करना आसान हो गया है, जिन्होंने आयकर रिटर्न में विदेशी परिसंपत्तियों का खुलासा नहीं किया।
रिपोर्ट में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आने के बाद विभाग ने इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ मामलों में विदेशों में किए गए निवेश, विदेशी बैंक खातों या अन्य वित्तीय संपत्तियों का उल्लेख आयकर रिटर्न में नहीं किया गया। अब संबंधित व्यक्तियों की आय के स्रोत, धन के प्रवाह और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कर चोरी या अवैध वित्तीय गतिविधियां तो नहीं हुई हैं।
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कर विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संपत्तियों को छिपाने के मामलों में आयकर विभाग पहले संबंधित करदाता को अपना आयकर रिटर्न संशोधित करने का अवसर देता है। यदि निर्धारित समय के भीतर त्रुटियों को ठीक नहीं किया जाता, तो विभाग नोटिस जारी कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू करता है। जांच में अघोषित विदेशी संपत्ति मिलने पर ब्लैक मनी (अनडिस्क्लोज्ड फॉरेन इनकम एंड एसेट्स) कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट अर्पित गोयल के अनुसार, ऐसे मामलों में अघोषित विदेशी आय या संपत्ति पर 30 प्रतिशत कर के साथ 90 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति ने 20 लाख रुपये से अधिक मूल्य की विदेशी संपत्ति की जानकारी छिपाई है, तो उस पर 10 लाख रुपये तक का अलग जुर्माना भी लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में तलाशी, सर्वे, बैंक खातों की जांच और अभियोजन जैसी कठोर कार्रवाई का भी प्रावधान है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिन मामलों में केवल तकनीकी त्रुटियां या अनजाने में हुई चूक सामने आएगी, वहां कानून के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। लेकिन जहां जानबूझकर जानकारी छिपाने या कर चोरी के स्पष्ट प्रमाण मिलेंगे, वहां किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर को मिलाकर आईटीआर दाखिल करने वाले करदाताओं की संख्या बढ़कर 22.17 लाख से अधिक हो चुकी है। पिछले एक वर्ष में करीब 42 हजार नए करदाता आयकर प्रणाली से जुड़े हैं। इनमें अकेले गाजियाबाद में 19 लाख से अधिक आयकरदाता पंजीकृत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल निगरानी, एआई आधारित विश्लेषण और वैश्विक वित्तीय सूचनाओं के आदान-प्रदान से अब विदेशी संपत्तियां और अघोषित आय छिपाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है। ऐसे में करदाताओं के लिए समय रहते सही और पूर्ण जानकारी के साथ आयकर रिटर्न दाखिल करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
