सहारनपुर। नेपाल और थाईलैंड से लेकर भारत के कई राज्यों तक फैले नकली सिक्कों के नेटवर्क का उत्तर प्रदेश में एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग सेंटर सामने आया है। सहारनपुर पुलिस ने तीतरों थाना क्षेत्र में चल रही कथित हाईटेक नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। मौके से छह स्वचालित मशीनों के साथ भारी मात्रा में मशीनरी, डाई, तैयार और अधबने सिक्के बरामद किए गए हैं। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर नकली सिक्कों का उत्पादन किया जा रहा था। छह स्वचालित मशीनों की मदद से रोजाना ₹20 के करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार किए जाते थे। मौके से 6,400 तैयार सिक्के बरामद हुए, जिनकी अंकित कीमत ₹1.28 लाख बताई गई है। इसके अलावा करीब ₹5 लाख कीमत के अधबने सिक्के भी मिले हैं।
फैक्ट्री से सिक्के बनाने और उन्हें अंतिम रूप देने में इस्तेमाल होने वाला बड़ा उपकरण तंत्र भी बरामद हुआ है। पुलिस ने कुल 59 डाई जब्त की हैं, जिनमें 39 बिना मुहर वाली और 20 मुहर लगी डाई शामिल हैं। इसके अलावा डाई पॉलिश करने की मशीन, घिसाई के पत्थर, हथौड़े, रेती, रिंच, आरी, इलेक्ट्रॉनिक कांटा और ओवन भी मिला है। बरामद सामान से संकेत मिलता है कि यहां सिक्कों का उत्पादन व्यवस्थित और बड़े स्तर पर किया जा रहा था।
गिरोह के कथित सरगना पंजाब निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभयप्रताप सिंह को लेकर पुलिस ने बताया कि वह वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय रहा है। पहले सुनार का काम करने वाले उपकार ने सिक्के ढालने की तकनीक सीखी और इसके बाद अवैध टकसाल चलाने लगा। वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उस पर ₹1 लाख का इनाम घोषित किया था और उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया गया था। उस समय उसके कथित संपर्क नेपाल और थाईलैंड तक सामने आए थे।
पुलिस के अनुसार, जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात सहारनपुर निवासी हिमांशु से हुई। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नेटवर्क खड़ा किया और तीतरों में नकली सिक्कों की फैक्ट्री स्थापित की। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि एक ₹20 का नकली सिक्का तैयार करने में गिरोह का करीब ₹5 से ₹6 खर्च होता था। तैयार सिक्कों को एजेंटों को ₹12 से ₹15 में बेचने का आरोप है। इसके बाद एजेंट इन सिक्कों को सीधे बाजार में चलाने के बजाय ऐसे स्थानों पर खपाते थे, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में नकदी का लेनदेन होता है। इनमें शराब के ठेके, टोल प्लाजा और बड़ी किराना दुकानें शामिल बताई गई हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने अब तक ₹70 करोड़ से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में खपाने की बात स्वीकार करने का दावा किया है। हालांकि इस दावे की पुष्टि के लिए पुलिस रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। मौके से मिले सात हिसाब रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन जांच के अहम आधार बने हैं। पुलिस इनके डिजिटल डेटा और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है।
जांच में बिहार के मधुबनी और उत्तर प्रदेश के भदोही तथा बदायूं समेत कई जिलों तक नेटवर्क के तार जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब उत्पादन, आपूर्ति और बाजार में सिक्कों की खपत से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि नकली सिक्के किन-किन इलाकों में भेजे गए और उनसे जुड़े एजेंट कौन हैं।
पुलिस का कहना है कि कार्रवाई केवल नकली सिक्कों और मशीनरी की बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगी। आरोपियों द्वारा कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों की भी पहचान की जाएगी। ऐसी संपत्तियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्की की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
