रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। आपराधिक अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में सफल घोषित सभी 2,204 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर उनकी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा है। जांच एजेंसी इन अभ्यर्थियों के पास मौजूद ओएमआर रिकॉर्ड का मिलान जेपीएससी कार्यालय से जब्त मूल अभिलेखों से करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दोनों रिकॉर्ड में किसी प्रकार का अंतर या छेड़छाड़ हुई है या नहीं।
सीआईडी की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार, पीटी परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थियों को 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी जमा करनी होगी। जिन अभ्यर्थियों के पास यह प्रति उपलब्ध नहीं है, उन्हें इसके पीछे का कारण भी स्पष्ट करना होगा। जांच एजेंसी ने निर्देश दिया है कि अभ्यर्थी ओएमआर शीट की स्पष्ट तस्वीर या पीडीएफ फाइल तैयार कर निर्धारित व्हाट्सएप नंबर और आधिकारिक ईमेल पते पर भेजें, ताकि डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
जांच अधिकारियों के अनुसार, अभ्यर्थियों द्वारा उपलब्ध कराई गई ओएमआर शीट का मिलान जेपीएससी कार्यालय से जब्त कार्बन कॉपी और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड से किया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी की ओएमआर शीट और आयोग के रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित अभ्यर्थी से विस्तृत पूछताछ की जाएगी। सीआईडी का मानना है कि इस प्रक्रिया से परीक्षा परिणामों से जुड़े संभावित तकनीकी या प्रक्रियागत बदलावों की पुष्टि करने में सहायता मिल सकती है।
इसी बीच जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते से सीआईडी ने लगातार दूसरे दिन भी लगभग आठ घंटे तक पूछताछ की। जांच एजेंसी ने उन्हें 31 जुलाई को फिर से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। पूछताछ के दौरान पूर्व अध्यक्ष का सामना आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से भी कराया गया। अधिकारियों के अनुसार, आमने-सामने पूछताछ और बयानों के सत्यापन के दौरान जांच को आगे बढ़ाने वाले कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनकी अब अन्य साक्ष्यों के साथ पुष्टि की जा रही है।
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मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों की पुलिस रिमांड अवधि समाप्त होने पर अदालत ने उसे दो दिन के लिए और बढ़ा दिया। इस दौरान सीआईडी ने श्वेता गुप्ता, रामवीर सिंह, अभय तिवारी, मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद से विस्तृत पूछताछ की। इसके अलावा प्रदीप कुमार सिंह, हेमंत वर्मा और संजय कुमार से भी विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली गई। जांच एजेंसी सभी आरोपियों के बयानों का मिलान डिजिटल साक्ष्यों, जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के साथ कर रही है।
सीआईडी की जांच का प्रमुख फोकस परीक्षा संचालन प्रक्रिया, ओएमआर शीट के प्रबंधन, मूल्यांकन प्रणाली और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का सत्यापन करना है। इसके लिए जब्त कंप्यूटर, सर्वर, डिजिटल स्टोरेज उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का फॉरेंसिक विश्लेषण भी कराया जा रहा है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि परीक्षा प्रक्रिया के किसी भी चरण में अनधिकृत हस्तक्षेप या रिकॉर्ड में बदलाव हुआ था या नहीं।
उधर, जांच के समानांतर राज्यभर के अभ्यर्थियों में भी असंतोष बढ़ता दिखाई दिया। बुधवार को रांची में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए और जेपीएससी की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने जेपीएससी और जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की भी मांग उठाई। सैकड़ों छात्रों ने जुलूस निकालकर अलबर्ट एक्का चौक पर सभा आयोजित की और निष्पक्ष जांच तथा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
फिलहाल सीआईडी की जांच जारी है और एजेंसी दस्तावेजी, डिजिटल तथा मौखिक साक्ष्यों का समग्र विश्लेषण कर रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या छेड़छाड़ हुई थी या नहीं, तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे किन व्यक्तियों के विरुद्ध प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
