कानपुर: सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकों में कथित जालसाजी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने बैंक मैनेजर और बैंक कर्मचारी समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक ठेकेदार की फर्म के नाम पर अनधिकृत बैंक खाता खोला गया, जाली हस्ताक्षर किए गए और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) के ठेकों से जुड़े कार्यों में धोखाधड़ी की गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर कल्याणपुर थाने में दर्ज इस मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है।
शिकायत लखनपुर हाउसिंग सोसायटी निवासी दिनेश कुमार मिश्रा ने दर्ज कराई है, जो मेसर्स जी दुर्गा ट्रेडिंग कंपनी के प्रोपराइटर हैं। शिकायत के अनुसार, उनकी फर्म को वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान एमईएस लखनऊ और अयोध्या से सिविल कार्यों के ठेके विधिवत प्राप्त हुए थे।
दिनेश कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया कि इसी दौरान उन्हें स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर होने के कारण ऑपरेशन कराना पड़ा और लंबे समय तक वह चलने-फिरने में असमर्थ रहे। उनकी इसी शारीरिक स्थिति का फायदा उठाते हुए उनके परिचित देवेंद्र कुमार पांडेय, निवासी भीमनगर, आलमबाग (लखनऊ), और रबिन सक्सेना ने उनसे संपर्क किया और उनकी फर्म के कार्यों का संचालन कराने का भरोसा दिलाया।
शिकायत के अनुसार, इसके कुछ समय बाद आईसीआईसीआई बैंक की विकास नगर शाखा का कर्मचारी अंकित सिंह उनके घर बैंक खाता खोलने की औपचारिकताएं पूरी करने पहुंचा। आरोप है कि देवेंद्र कुमार पांडेय, अंकित सिंह तथा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और बिना वैध अनुमति के मेसर्स जी दुर्गा ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर बैंक खाता खोल दिया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि फर्जी दस्तावेजों, जाली हस्ताक्षरों और अन्य कूटरचित अभिलेखों का उपयोग कर उस खाते का संचालन किया गया तथा फर्म से जुड़े वित्तीय लेनदेन किए गए। दिनेश कुमार मिश्रा का कहना है कि उन्हें इन कथित गतिविधियों की जानकारी तब मिली, जब सरकारी ठेकों के निष्पादन के दौरान अनियमितताओं का पता चला।
मामले का खुलासा तब हुआ जब उन्होंने एमईएस लखनऊ और अयोध्या के अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। शिकायत के अनुसार, वहां से पता चला कि उनकी फर्म के नाम पर फर्जी हस्ताक्षरों से तैयार की गई पावर ऑफ अटॉर्नी जमा की गई थी। आरोप है कि इस दस्तावेज के माध्यम से अन्य व्यक्तियों को उनकी फर्म की ओर से कार्य करने का अधिकार दिखाया गया।
पुलिस को आशंका है कि इसी कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और अनधिकृत बैंक खाते का इस्तेमाल एमईएस ठेकों से जुड़े वित्तीय लेनदेन में किया गया। जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या सरकारी परियोजनाओं से संबंधित भुगतान विवादित बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे और क्या टेंडर प्रक्रिया में अन्य फर्जी दस्तावेजों का भी इस्तेमाल हुआ।
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शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने देवेंद्र कुमार पांडेय, रबिन सक्सेना, अंकित सिंह, आईसीआईसीआई बैंक विकास नगर शाखा के तत्कालीन बैंक मैनेजर, आशीष अग्निहोत्री, बौद्ध प्रकाश और राघवेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
जांच के दौरान पुलिस बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, खाता खोलने के अभिलेख, हस्ताक्षरों के नमूने, डिजिटल साक्ष्य और एमईएस टेंडरों से संबंधित पत्राचार एकत्र कर रही है। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक संचार और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि कथित षड्यंत्र की पूरी श्रृंखला और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
पुलिस बैंक अधिकारियों और संबंधित सरकारी विभागों के साथ समन्वय कर खाता खोलने की प्रक्रिया तथा टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता का सत्यापन कर रही है। विवादित हस्ताक्षरों और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए हस्तलेखन विशेषज्ञों तथा फोरेंसिक विशेषज्ञों की भी सहायता ली जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी आरोपों की पुष्टि दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी ठेकों और वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी की गई, तो संबंधित सभी आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
