लखनऊ: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने नई तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। यह निर्णय अदालत द्वारा आपराधिक मामले की जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में कराने के निर्देश दिए जाने के बाद लिया गया। आधिकारिक तौर पर अभी एसआईटी के सदस्यों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार जांच की कमान लखनऊ के पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस को सौंपी गई है। उनके साथ अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन बर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. गौरव ग्रोवर को एसआईटी का सदस्य बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करते समय नई एसआईटी के गठन की जानकारी भी दे सकती है।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी किरण एस इससे पहले भी राज्य सरकार द्वारा 13 जून को मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी के सदस्य रह चुके हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय जांच और जटिल मामलों का अनुभव प्राप्त है तथा वे पूर्व में इंटरपोल और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में भी कार्य कर चुके हैं। सरकार ने इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें नई जांच टीम का नेतृत्व सौंपने का निर्णय लिया है।
यह मामला उस समय नया मोड़ ले गया जब 20 जुलाई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चढ़ावा चोरी का मामला आपराधिक प्रकृति का है और इसकी जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की विशेष टीम द्वारा की जानी चाहिए। अदालत के निर्देश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गृह विभाग को तत्काल नई एसआईटी गठित करने, न्यायालय के आदेश का अध्ययन करने और उसके अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गृह विभाग ने नई एसआईटी का गठन कर दिया, हालांकि देर रात तक इसकी औपचारिक अधिसूचना और सदस्यों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।
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इससे पहले राज्य सरकार ने 13 जून को मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन किया था, जिसने 15 जून से अयोध्या में जांच शुरू की थी। प्रारंभिक जांच के दौरान टीम ने मंदिर प्रशासन, चढ़ावा प्रबंधन व्यवस्था, अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया। जांच के दौरान कई बिंदुओं पर विस्तृत पड़ताल की आवश्यकता महसूस होने के कारण एसआईटी ने अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी।
सूत्रों के मुताबिक, पहली एसआईटी ने 22 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी थी। रिपोर्ट में जांच का दायरा अपेक्षा से अधिक व्यापक होने की बात कही गई थी और कई पहलुओं पर आगे जांच की आवश्यकता जताई गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने एसआईटी को अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 30 जुलाई तक का समय दिया। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित नई एसआईटी पूर्व में एकत्र किए गए साक्ष्यों, दस्तावेजों और जांच निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए आगे की जांच करेगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि नई एसआईटी केवल पहले की जांच को आगे नहीं बढ़ाएगी, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर नए सिरे से साक्ष्य जुटाने, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ करने तथा वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड का दोबारा परीक्षण करने का अधिकार भी रखेगी। जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां यह भी सुनिश्चित करेंगी कि चढ़ावा संग्रह, गिनती, रिकॉर्ड संधारण और जमा प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर अनियमितता तो नहीं हुई।
27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई के दौरान राज्य सरकार नई एसआईटी के गठन और अब तक की जांच प्रगति से संबंधित विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके बाद अदालत आगे की जांच की दिशा और समय-सीमा को लेकर आवश्यक निर्देश दे सकती है। राज्य सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाएगी तथा जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
