लखनऊ। फर्जी वाहन नंबर और जाली दस्तावेज के आधार पर फास्टैग बनवाकर टोल प्लाजा पार करने के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ राजस्व नुकसान का आंकड़ा भी बड़ा होता जा रहा है। शुरुआती जांच में अब तक चिह्नित 142 वाहनों के जरिए पांच करोड़ रुपये से अधिक के टोल राजस्व की चपत लगाए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी का मानना है कि यह केवल प्रारंभिक आकलन है। सभी वाहनों और उनके पुराने रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद नुकसान की रकम और बढ़ सकती है।
मामले में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की ओर से तीन अप्रैल को सरोजनीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायत में फर्जी वाहन नंबर और दस्तावेजों के इस्तेमाल के जरिए फास्टैग तैयार कर टोल व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने से जुड़े आरोप लगाए गए थे। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना विशेष कार्यबल (एसटीएफ) को सौंप दी गई। जांच के दौरान एसटीएफ ने कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
जांच आगे बढ़ने पर एसटीएफ ने बीते मंगलवार को इटौंजा टोल प्लाजा पर छापा मारकर वहां लगे डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण और दस्तावेज कब्जे में लिए। टीम ने टोल प्लाजा का डीवीआर, सर्वर और अन्य संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है। अब जांच एजेंसी पुराने रिकॉर्ड को रिकवर कराने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी पहचान वाले वाहनों ने किस अवधि में टोल प्लाजा का इस्तेमाल किया और कितनी बार टोल पार किया।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर आशंका जताई जा रही है कि मामले से जुड़े साक्ष्यों को हटाने या छिपाने के लिए सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई हो सकती है। हालांकि, फुटेज की तकनीकी जांच और सर्वर से पुराना डाटा रिकवर होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्डिंग में वास्तव में किसी तरह की छेड़छाड़ हुई थी या नहीं।
एसटीएफ अब डीवीआर और सर्वर में सुरक्षित पुराने डाटा को खंगाल रही है। इसका उद्देश्य केवल वाहनों की संख्या का पता लगाना नहीं, बल्कि उनके टोल प्लाजा से गुजरने की पूरी समयावधि और आवृत्ति का मिलान करना भी है। यदि रिकॉर्ड उपलब्ध हो जाता है तो फर्जी नंबर से चलने वाले वाहनों की आवाजाही और उनसे जुड़े फास्टैग लेनदेन की तस्वीर साफ हो सकती है।
जांच में चिह्नित 142 वाहनों से पांच करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान का शुरुआती अनुमान सामने आने के बाद एजेंसी अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि फर्जी फास्टैग का इस्तेमाल केवल एक टोल प्लाजा तक सीमित था या इन्हीं वाहनों ने दूसरे टोल मार्गों पर भी यात्रा की। अलग-अलग रिकॉर्ड का मिलान होने पर संभावित नुकसान का दायरा और बड़ा हो सकता है।
जांच एजेंसी फास्टैग से जुड़े दस्तावेज, वाहन नंबर, टोल पार करने के रिकॉर्ड और उपलब्ध डिजिटल डाटा का मिलान कर रही है। इसके साथ ही गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आए तथ्यों को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि फर्जी वाहन नंबर और जाली दस्तावेज तैयार कराने, फास्टैग बनवाने तथा टोल व्यवस्था में उसका इस्तेमाल करने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
अभी तक सामने आया ₹5 करोड़ से अधिक का आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा रहा है। एसटीएफ की तकनीकी जांच और पुराने सर्वर डाटा की रिकवरी पूरी होने के बाद वाहनों की वास्तविक संख्या, टोल से गुजरने की अवधि और राजस्व नुकसान की सटीक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
