नई दिल्ली: नीट पेपर लीक और यूजीसी नेट जून-2026 की परीक्षा में प्रश्नपत्रों के अनुवाद से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है। परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही खामियों के बीच NTA के 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा और उसे तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर मजबूत करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह को एजेंसी की सभी परीक्षा प्रक्रियाओं का विस्तृत ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। इसके तहत परीक्षा की शुरुआत से लेकर प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित रखने, केंद्रों तक पहुंचाने, अनुवाद, डिजिटल सुरक्षा और परिणाम तैयार करने तक की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। मंत्रालय की ओर से परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को भी कहा गया है।
यह कार्रवाई शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सामने आई। बैठक में उच्च शिक्षा सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी, NTA के महानिदेशक और मंत्रालय व एजेंसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों, तकनीकी खामियों और परीक्षा संचालन में सामने आई कमियों की समीक्षा की गई।
यूजीसी नेट जून-2026 में प्रश्नपत्रों के अनुवाद की प्रक्रिया को लेकर सबसे गंभीर सवाल उठे। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग भाषाओं में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के लिए मानवीय विशेषज्ञों की निगरानी पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय भारतीय AI आधारित ट्रांसलेशन टूल भाषिणी, अनुवादिनी और सर्वम का इस्तेमाल किया गया। इसके परिणामस्वरूप कई प्रश्नों के अनुवाद में अर्थ बदल गया। कुछ मामलों में शब्दों के मायने अलग हो गए, जबकि कई शब्दों की स्पेलिंग भी गलत हो गई।
सबसे अधिक समस्या सोशियोलॉजी के प्रश्नपत्र में सामने आई। अनुवाद की गड़बड़ियों ने प्रश्नों के मूल अर्थ को प्रभावित किया, जिसके बाद इस विषय की परीक्षा रद्द करने का फैसला करना पड़ा। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी, क्योंकि प्रश्नपत्र की भाषा में बदलाव सीधे उनके प्रदर्शन और मूल्यांकन को प्रभावित कर सकता था।
मंत्रालय अब परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल के साथ मानवीय विशेषज्ञता को भी मजबूत करने की तैयारी में है। साइबर सुरक्षा, साइकोमेट्रिक्स, प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में तकनीकी जोखिम कम करना और प्रश्नपत्र की गुणवत्ता तथा सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ निगरानी बढ़ाना है।
NTA में प्रशासनिक और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए नए पेशेवर पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एजेंसी ने मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO), मुख्य वित्त अधिकारी (CFO), मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (CISO), महाप्रबंधक (परीक्षा सुरक्षा) और महाप्रबंधक (अनुसंधान एवं विकास तथा साइकोमेट्रिक्स) जैसे पदों समेत कुल 10 पेशेवर पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है।
नीट और यूजीसी नेट से जुड़े विवादों के बाद सरकार का फोकस अब परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही, तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने पर है। NTA के भीतर कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई और विशेषज्ञ पदों पर प्रस्तावित नियुक्तियों को इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा संचालन में और बदलाव किए जाने की संभावना है।
