पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में एक 25 वर्षीय आईटी इंजीनियर महिला को वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से शादी का झांसा देकर ₹4.35 लाख की कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने खुद को पहले भारतीय विदेश सेवा (IFS) का अधिकारी और बाद में रूस के मॉस्को में तैनात रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का अधिकारी बताया। कई महीनों तक विश्वास जीतने के बाद उसने बीमारी, आर्थिक संकट और पारिवारिक विवाद का हवाला देकर महिला से अलग-अलग बैंक खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर करा लिए।
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता ने चंदन नगर पुलिस थाने में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि 12 फरवरी 2026 को एक लोकप्रिय वैवाहिक वेबसाइट पर उसे “विनीत कुमार” नाम के व्यक्ति की ओर से संपर्क अनुरोध मिला। आरोपी ने दावा किया कि उसे महिला की प्रोफाइल पसंद आई है और वह रूस में भारतीय विदेश सेवा का अधिकारी है। बातचीत आगे बढ़ने पर उसने खुद को मॉस्को में कार्यरत RAW अधिकारी भी बताया।
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने व्हाट्सएप के जरिए महिला से नियमित संपर्क बनाए रखा। उसने अपना कथित बायोडाटा और फोटो भी भेजे तथा महिला की मां और भाई से फोन पर बातचीत कर उनका विश्वास जीतने की कोशिश की। इतना ही नहीं, उसने महिला की मां का मोबाइल नंबर “News 365 Network” नामक एक व्हाट्सएप समूह में जोड़ा और बाद में एक महिला से भी बात कराई, जिसे उसने अपनी मां बताया। इन घटनाओं के बाद पीड़िता के परिवार ने कथित विवाह प्रस्ताव के लिए सहमति भी दे दी।
पुलिस के अनुसार, 18 मार्च 2026 को आरोपी ने महिला को बताया कि उसे सीने में गंभीर दर्द है और उसका भुगतान समय पर नहीं मिला है। उसने यह भी दावा किया कि परिवार इस विवाह के खिलाफ है, इसलिए उसे घर से आर्थिक सहायता नहीं मिल रही। इसके अलावा उसने अपेंडिक्स का ऑपरेशन होने की बात कहकर इलाज और अन्य खर्चों के लिए तत्काल धन की मांग की।
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी लगातार अलग-अलग कारण बताकर पैसे मांगता रहा। उसके झांसे में आकर महिला ने 19 मार्च से 28 मई 2026 के बीच 16 ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹4,35,200 ट्रांसफर कर दिए। पुलिस अब इन सभी बैंक खातों और धन के प्रवाह की जांच कर रही है।
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कुछ समय बाद महिला को एक अन्य व्यक्ति का संदेश मिला, जिसने खुद को विनीत कुमार का भाई बताया। उसने दावा किया कि विनीत ने आत्महत्या कर ली है और वह महिला के सारे पैसे लौटा देगा। हालांकि, जब पीड़िता ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी ने कथित तौर पर उसे अपशब्द कहे और सोशल मीडिया पर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें प्रसारित करने की धमकी दी।
इसके बाद महिला को अपने साथ धोखाधड़ी होने का एहसास हुआ। उसने 23 जून को राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। साथ ही पुणे साइबर पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दी गई। प्रारंभिक सत्यापन के बाद पुलिस ने 21 जुलाई को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जांच एजेंसियां अब उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और व्हाट्सएप संचार का विश्लेषण कर रही हैं जिनका इस्तेमाल कथित साइबर अपराधियों ने किया। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या यह गिरोह वैवाहिक वेबसाइटों के माध्यम से अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना बना चुका है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वैवाहिक वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर मिलने वाले व्यक्तियों की पहचान केवल उनके दावों के आधार पर स्वीकार नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारी, सेना, खुफिया एजेंसी या विदेश में उच्च पद पर होने का दावा करे और कुछ समय बाद बीमारी, आपातकाल या पारिवारिक संकट का हवाला देकर पैसे मांगे, तो इसे संभावित साइबर धोखाधड़ी का संकेत माना जाना चाहिए। किसी भी प्रकार की धनराशि भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान का स्वतंत्र सत्यापन करना आवश्यक है। यदि इस प्रकार की ठगी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, जिससे धन की रिकवरी और आरोपियों तक पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है।
