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Home»Policy Watch»ITR में तकनीकी गलती से नहीं छिन सकता वैध टैक्स लाभ, ₹65.21 लाख VRS मामले में ITAT का अहम फैसला
Policy Watch

ITR में तकनीकी गलती से नहीं छिन सकता वैध टैक्स लाभ, ₹65.21 लाख VRS मामले में ITAT का अहम फैसला

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 19, 2026No Comments3 Mins Read
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पुणे आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने कर्मचारी को दी राहत; कहा- रिपोर्टिंग की अनजाने में हुई त्रुटि के आधार पर कर छूट से वंचित नहीं किया जा सकता
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नई दिल्ली: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय की गई तकनीकी या रिपोर्टिंग संबंधी गलती करदाताओं के लिए महंगी पड़ सकती है, लेकिन यदि करदाता कानून के तहत कर छूट का वास्तविक हकदार है, तो केवल ऐसी त्रुटि के आधार पर उसे उस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। पुणे आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने ₹65.21 लाख के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) भुगतान से जुड़े एक मामले में यही महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित करते हुए कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया है।

मामला एक कर्मचारी से जुड़ा है, जिसे कंपनी के विनिर्माण संयंत्र के बंद होने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत ₹65.21 लाख का भुगतान किया गया था। इस राशि में एक्स-ग्रेशिया, नोटिस पे और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ शामिल थे। आयकर रिटर्न दाखिल करते समय कर्मचारी ने पूरी राशि को गलती से कर योग्य आय (Taxable Income) के रूप में घोषित कर दिया, जबकि आयकर कानून के तहत यह भुगतान कर छूट के दायरे में आता था।

इस त्रुटि के कारण कर्मचारी को उपलब्ध कर राहत नहीं मिल सकी और मामला आयकर विवाद तक पहुंच गया। सुनवाई के दौरान कर्मचारी ने तर्क दिया कि रिटर्न में हुई गलती जानबूझकर नहीं थी, बल्कि केवल रिपोर्टिंग संबंधी तकनीकी त्रुटि थी।

मामले की सुनवाई करते हुए पुणे ITAT ने कहा कि यदि कोई करदाता कानून के अनुसार कर छूट पाने का पात्र है, तो केवल आयकर रिटर्न में हुई तकनीकी गलती के आधार पर उसका वैध अधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायाधिकरण ने माना कि रिकॉर्ड से ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि कर्मचारी ने गलत जानकारी देकर अनुचित लाभ लेने का प्रयास किया हो। इसलिए VRS के तहत प्राप्त ₹65.21 लाख की राशि को करमुक्त मानते हुए कर्मचारी को राहत प्रदान की गई।

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न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कर निर्धारण का उद्देश्य वास्तविक कर देयता तय करना है, न कि केवल तकनीकी त्रुटियों के आधार पर किसी पात्र व्यक्ति को वैधानिक लाभ से वंचित करना। हालांकि, प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

कर विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिनसे आयकर रिटर्न दाखिल करते समय अनजाने में रिपोर्टिंग संबंधी त्रुटियां हो जाती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हर प्रकार की गलती पर स्वतः राहत मिल जाएगी। राहत तभी संभव है, जब करदाता यह साबित कर सके कि वह संबंधित कर छूट का वास्तविक पात्र था और त्रुटि केवल तकनीकी या रिपोर्टिंग तक सीमित थी।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ITR दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म-16, वेतन विवरण, निवेश संबंधी दस्तावेज, VRS भुगतान, ग्रेच्युटी, पेंशन, पूंजीगत लाभ (Capital Gains) और अन्य कर छूट से जुड़े रिकॉर्ड का सावधानीपूर्वक मिलान करना चाहिए। यदि किसी प्रावधान को लेकर संदेह हो तो योग्य कर सलाहकार से परामर्श लेना उचित रहेगा।

ITAT का यह फैसला इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि करदाता के वैधानिक अधिकार केवल तकनीकी या अनजाने में हुई रिपोर्टिंग त्रुटि के कारण समाप्त नहीं किए जा सकते, बशर्ते वह कानून के तहत संबंधित कर लाभ प्राप्त करने का वास्तविक हकदार हो।

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