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Home»Policy Watch»H-1B वीजा कथित धोखाधड़ी की व्यापक जांच शुरू, ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई में कॉग्निजेंट का भी जिक्र
Policy Watch

H-1B वीजा कथित धोखाधड़ी की व्यापक जांच शुरू, ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई में कॉग्निजेंट का भी जिक्र

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 8, 2026No Comments3 Mins Read
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अमेरिकी श्रम विभाग ने H-1B और PERM वीजा कार्यक्रमों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए दर्जनों समन जारी किए; व्हिसलब्लोअर की जानकारी के आधार पर कॉग्निजेंट का नाम आया, फिलहाल कोई औपचारिक आरोप या कार्रवाई नहीं
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वॉशिंगटन डी.सी. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने H-1B और PERM वर्क वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी की व्यापक जांच शुरू की है। अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labor) के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय ने इस जांच के तहत दर्जनों समन (Subpoenas) जारी किए हैं। अधिकारियों ने इसे विदेशी श्रम (Foreign Labour) से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामलों की अब तक की सबसे व्यापक जांच बताया है।

FOX Business से बातचीत में अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने कहा कि जांच एजेंसियों को कई बड़ी कंपनियों से संबंधित व्हिसलब्लोअर सूचनाएं मिली हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने H-1B वीजा और स्थायी निवास (PERM) प्रायोजन से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए आईटी कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) का नाम लिया।

हालांकि, डी’एस्पोसिटो ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कॉग्निजेंट पर किसी प्रकार के गलत कार्य का आरोप नहीं लगाया है और न ही कंपनी के खिलाफ कोई औपचारिक मामला दर्ज या प्रवर्तन कार्रवाई की घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी का नाम केवल जांच के लिए प्राप्त व्हिसलब्लोअर सूचनाओं के संदर्भ में सामने आया है।

अधिकारियों के अनुसार, जांच का मुख्य फोकस H-1B वीजा कार्यक्रम और PERM लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग की जांच करना है। प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की फ्रॉड टास्क फोर्स के साथ मिलकर सभी उपलब्ध सुरागों की जांच की जाएगी।

यह घोषणा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में आयोजित किए जाने वाले एंटी-फ्रॉड कार्यक्रम से पहले की गई, जहां प्रशासन धोखाधड़ी और संगठित अपराध के खिलाफ अपनी रणनीति को प्रमुखता से रखने की तैयारी कर रहा है।

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डी’एस्पोसिटो ने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में वीजा संबंधी धोखाधड़ी और विदेशी श्रमिकों के कथित शोषण का संबंध मानव तस्करी, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों और संगठित अपराध नेटवर्क से हो सकता है। उनके अनुसार, प्रशासन इस जांच को अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानता है।

H-1B वीजा कार्यक्रम अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। यह वीजा सामान्यतः तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है और इसे अधिकतम छह वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, PERM कार्यक्रम वह श्रम प्रमाणन प्रक्रिया है, जिसे कई विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए प्रायोजित करने से पहले नियोक्ताओं को पूरा करना होता है।

प्रौद्योगिकी (Technology) क्षेत्र H-1B वीजा का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बना हुआ है और हाल के वर्षों में कुल नए आवेदनों का लगभग 60 से 70 प्रतिशत इसी क्षेत्र से आया है। इसके अलावा परामर्श, इंजीनियरिंग, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों द्वारा भी इस वीजा का व्यापक उपयोग किया जाता है।

यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब हाल ही में एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत उच्च कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों के H-1B वीजा आवेदन पर नियोक्ताओं से 100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लेने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने कहा था कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना कार्यपालिका ऐसा शुल्क लागू नहीं कर सकती।

फिलहाल यह जांच प्रारंभिक चरण में है। कॉग्निजेंट या किसी अन्य कंपनी के खिलाफ कोई आपराधिक आरोप दर्ज नहीं किया गया है और मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच के अधीन हैं।

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