तिरुवनंतपुरम: केरल में अवैध डिजिटल लोन ऐप्स का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। तत्काल और आसान ऋण का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाने वाले इन फर्जी प्लेटफॉर्मों ने राज्य में अब तक करीब ₹800 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, महिलाएं, निम्न आय वर्ग के परिवार, छोटे कारोबारी, छात्र और आर्थिक संकट से जूझ रहे लोग सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कई पीड़ितों को लगातार ब्लैकमेल, सार्वजनिक बदनामी और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ मामलों में यह दबाव आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं तक पहुंच गया।
जांच में पता चला है कि ये अवैध लोन ऐप्स सोशल मीडिया विज्ञापनों, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से तत्काल ऋण उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। आवेदन प्रक्रिया के दौरान उपयोगकर्ताओं से मोबाइल संपर्क सूची, फोटो गैलरी, कैमरा, माइक्रोफोन और लोकेशन जैसी संवेदनशील अनुमतियां मांगी जाती हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे कई लोग जोखिम को समझे बिना इन अनुमतियों को स्वीकार कर लेते हैं, जिससे उनका निजी डेटा साइबर अपराधियों के हाथ लग जाता है।
ऋण स्वीकृत होने के बाद उधारकर्ताओं पर अत्यधिक ब्याज, छिपे हुए शुल्क और बहुत कम समय में भुगतान करने का दबाव बनाया जाता है। समय पर भुगतान नहीं होने पर कथित रिकवरी एजेंट पीड़ितों के रिश्तेदारों, मित्रों और सहकर्मियों से संपर्क कर उन्हें बदनाम करने की धमकी देते हैं। कई मामलों में संपादित तस्वीरें और मानहानिकारक संदेश प्रसारित करने की चेतावनी दी जाती है, जिससे पीड़ितों की सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचता है। लगातार मानसिक दबाव के कारण कई लोग गंभीर मनोवैज्ञानिक संकट का सामना कर रहे हैं।
राज्य पुलिस और साइबर अपराध जांच एजेंसियों ने ऐसे कई संगठित नेटवर्कों की पहचान की है, जिनका संचालन देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी किए जाने की आशंका है। जांच के अनुसार, अपराधी शेल कंपनियों, फर्जी बैंक खातों, भुगतान गेटवे और म्यूल अकाउंट्स के जरिए अवैध धन का लेन-देन करते हैं, जिससे नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंचना कठिन हो जाता है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड की मदद से पूरे गिरोह की परतें खोलने में जुटी हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध लोन ऐप्स से होने वाली ठगी अब केवल वित्तीय अपराध नहीं रह गई है, बल्कि यह डेटा चोरी, साइबर ब्लैकमेल और संगठित डिजिटल शोषण का रूप ले चुकी है। अधिकांश पीड़ित शुरुआत में छोटी राशि का ऋण लेते हैं, लेकिन अत्यधिक ब्याज, जुर्माने और छिपे हुए शुल्क के कारण उनका कर्ज तेजी से बढ़ता जाता है। इसके बाद लगातार धमकियां और अपमानजनक व्यवहार उन्हें गंभीर मानसिक और आर्थिक संकट में धकेल देता है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि अवैध लोन ऐप्स लोगों की आर्थिक मजबूरी और डिजिटल जागरूकता की कमी का फायदा उठाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अनजान ऐप को संपर्क सूची, फोटो या अन्य निजी डेटा तक पहुंच देना गंभीर साइबर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है। उन्होंने लोगों से केवल अधिकृत और नियामकीय मानकों का पालन करने वाले वित्तीय संस्थानों से ही ऋण लेने की अपील की। साथ ही ऑनलाइन धमकी या ब्लैकमेल का सामना करने वाले लोगों से तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करने का आग्रह किया।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी सलाह दी है कि किसी भी लोन ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर, उपयोगकर्ता समीक्षाओं और नियामकीय स्थिति की जांच अवश्य करें। जो ऐप अत्यधिक व्यक्तिगत जानकारी या अनावश्यक मोबाइल अनुमतियां मांगते हों, उन्हें संदिग्ध मानकर तुरंत हटाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच अवैध लोन ऐप्स पर कड़ी निगरानी, वित्तीय संस्थानों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा आम लोगों में साइबर जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका कहना है कि समय पर सख्त कार्रवाई और डिजिटल सतर्कता ही इस तेजी से बढ़ते साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे मजबूत उपाय है।
