मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के मेरठ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्रवाई में फूड सप्लीमेंट की आड़ में कथित रूप से नकली दवा तैयार कर बाजार में खपाने का मामला सामने आया है। संयुक्त छापेमारी के दौरान करीब छह लाख कैप्सूल, ब्लिस्टर पैकेजिंग मशीन, कंप्रेसर मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए गए। जांच के आधार पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में मेरठ, बागपत और उत्तराखंड तक फैले संभावित नेटवर्क की जांच की जा रही है तथा संबंधित फर्मों के रिकॉर्ड, उत्पादन प्रक्रिया और वितरण चैनलों की पड़ताल की जा रही है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी और औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीम ने ग्राम खरदौनी शेखपुर, थाना इंचौली क्षेत्र स्थित एक परिसर में छापेमारी की। मौके से बड़ी मात्रा में कैप्सूल और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी बरामद हुई। जांच के दौरान अधिकारियों को संदेह हुआ कि फूड सप्लीमेंट के रूप में तैयार किए जाने वाले उत्पादों पर कथित रूप से दवा के लेबल लगाकर उन्हें बाजार में बेचा जा रहा था। बरामद सामग्री को जब्त कर उसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि रुद्रपुर (उत्तराखंड) स्थित मैसर्स आर.एस. ग्लोबल फार्मा तथा कुछ अन्य व्यक्तियों के बीच व्यावसायिक संबंध थे। आरोप है कि कंपनी के चर्चित ब्रांड Evion 400 mg Soft Gel Capsules के नाम और लेबल का इस्तेमाल करते हुए विटामिन ई युक्त फूड सप्लीमेंट को कथित रूप से 400 एमजी औषधीय उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में उत्पादों की गुणवत्ता, लेबलिंग और लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
मामले की कड़ियां जुड़ने पर जांच टीम ने उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित संबंधित फर्म का भी निरीक्षण किया। इसके बाद बागपत जिले की एक निर्माण इकाई पर संयुक्त छापेमारी की गई। जांच में पाया गया कि संबंधित निर्माता फर्म के पास केवल फूड हेल्थ सप्लीमेंट्स एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स के निर्माण का लाइसेंस था। आरोप है कि लाइसेंस की निर्धारित शर्तों के विपरीत बड़ी मात्रा में बिना पैकिंग वाले लगभग छह लाख Evion 400 mg लेबल वाले सॉफ्ट जेल कैप्सूल कथित रूप से दूसरी कंपनी को उपलब्ध कराए गए। अब विभाग यह पता लगा रहा है कि इन उत्पादों की आपूर्ति किन-किन राज्यों और बाजारों तक हुई।
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इस मामले में विकास चौहान, राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण कुंडा, रुद्रपुर स्थित कंपनी के प्रोपराइटर रोहित कुमार तथा निर्माता फर्म के निदेशक एवं उत्तरदायी व्यक्ति अमृत पटेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच एजेंसियां आरोपियों की भूमिका, कंपनियों के बीच हुए लेनदेन, निर्माण रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, बिल, टैक्स दस्तावेज और डिजिटल संचार का विश्लेषण कर रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित रूप से तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री से कितना आर्थिक लाभ अर्जित किया गया और क्या इस नेटवर्क से अन्य लोग भी जुड़े हुए थे।
Future Crime Research Foundation (FCRF) के अनुसार नकली या गलत लेबलिंग वाले स्वास्थ्य उत्पादों का कारोबार उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। संस्था का कहना है कि निर्माण, पैकेजिंग और वितरण श्रृंखला की नियमित निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग तथा लाइसेंस अनुपालन की प्रभावी जांच ऐसे मामलों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए कैप्सूल और अन्य सामग्री के नमूनों को परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट, प्रयोगशाला विश्लेषण और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि विवेचना में किसी बड़े संगठित नेटवर्क, अतिरिक्त फर्मों या अन्य सहयोगियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नागरिकों और दवा विक्रेताओं से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत स्रोतों से ही दवाएं और स्वास्थ्य उत्पाद खरीदें तथा संदिग्ध उत्पादों की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।
