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Home»Policy Watch»ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा में सीमा-पार साइबर ठगी पर चिंता, भुगतान प्रणालियों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
Policy Watch

ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा में सीमा-पार साइबर ठगी पर चिंता, भुगतान प्रणालियों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 12, 2026No Comments4 Mins Read
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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संगठित अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी नेटवर्क को खत्म करने, ठगी की रकम का पता लगाकर वापस लाने और पीड़ितों की सुरक्षा के लिए समन्वित कार्रवाई की जरूरत बताई गई
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नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों ने संगठित सीमा-पार धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों और डिजिटल तकनीक तथा भुगतान प्रणालियों के इस्तेमाल से आम लोगों को निशाना बनाए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्वीकार की गई नई दिल्ली घोषणा में इन अपराधों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई मजबूत करने पर जोर दिया गया। घोषणा में विशेष रूप से सीमा-पार भुगतान प्रणालियों में धोखाधड़ी की रोकथाम और डिजिटल वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
ब्रिक्स की नई दिल्ली घोषणा में कहा गया कि संगठित सीमा-पार धोखाधड़ी के नेटवर्क तेजी से डिजिटल तकनीक और वित्तीय प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे नेटवर्क कमजोर और असुरक्षित लोगों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर आर्थिक अपराध को अंजाम दे रहे हैं। सदस्य देशों ने इन नेटवर्क को खत्म करने, अपराध से हासिल रकम का पता लगाने और उसे बरामद करने के साथ पीड़ितों की सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई।
घोषणा में सीमा-पार भुगतान प्रणालियों में धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल वित्तीय सुरक्षा मजबूत करने और देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया गया। भुगतान प्रणालियों के जरिए अलग-अलग देशों में संचालित ठगी के मामलों को लेकर इस स्तर पर सामूहिक चिंता जताया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि साइबर अपराधी अब एक देश में बैठकर दूसरे देशों के नागरिकों और वित्तीय संस्थानों को आसानी से निशाना बना सकते हैं।
संगठित साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क में ऐसे गिरोह भी शामिल हैं, जो लोगों को धोखाधड़ी के लिए मजबूर करने या उन्हें अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इन नेटवर्क का संचालन कई देशों में फैले बुनियादी ढांचे के जरिए किया जा सकता है। इससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान, धन के प्रवाह का पता लगाने और ठगी की रकम वापस हासिल करने की चुनौती बढ़ जाती है।
ब्रिक्स देशों ने वित्तीय क्षेत्र में साइबर लचीलापन मजबूत करने के लिए सामूहिक और समन्वित उपायों पर भी जोर दिया। घोषणा में साइबर अभ्यास और प्रशिक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई, ताकि सदस्य देश वित्तीय क्षेत्र पर होने वाले साइबर हमलों और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के अपने अनुभव साझा कर सकें और व्यावहारिक सहयोग को मजबूत कर सकें।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

घोषणा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर भी सदस्य देशों ने साझा रुख सामने रखा। देशों ने सभी के लिए उन्नत एआई तकनीक तक निष्पक्ष और समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि एआई से जुड़े संसाधन सुरक्षित, भरोसेमंद, विश्वसनीय और समावेशी होने चाहिए। सदस्य देशों ने एआई को आर्थिक विकास और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा करने वाली तकनीक के रूप में स्वीकार किया।
डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे के बीच भुगतान प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर सहयोग पर दिया गया जोर विशेष महत्व रखता है। साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अलग-अलग देशों के बैंक खातों, डिजिटल भुगतान माध्यमों और अन्य वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल कर रकम को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर सकते हैं। सीमा-पार अपराध में ऐसे वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए देशों के बीच समय पर सूचना साझा करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
नई दिल्ली घोषणा का रुख यह संकेत देता है कि साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी अब केवल किसी एक देश की कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रह गई है। डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ अपराधियों के नेटवर्क भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ संदिग्ध लेनदेन की पहचान और ठगी की रकम की वसूली के लिए साझा तंत्र मजबूत करना जरूरी होगा।
ब्रिक्स देशों के बीच वित्तीय क्षेत्र में साइबर अभ्यास, आपसी सीख और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की पहल से भविष्य में सीमा-पार डिजिटल अपराधों की रोकथाम और जांच के लिए साझा क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है। घोषणा में डिजिटल वित्तीय सुरक्षा और संगठित सीमा-पार धोखाधड़ी को लेकर व्यक्त चिंता ने इस चुनौती के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को भी रेखांकित किया है।
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