नई दिल्ली। उड़ान के समय में बदलाव की सूचना यात्रियों के सही ईमेल पते पर नहीं भेजना एयरलाइन और यात्रा एजेंसी को भारी पड़ गया। नई दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग ने लंदन-दिल्ली उड़ान में सवार होने से वंचित दो यात्रियों को कुल ₹1.8 लाख की राहत देने का आदेश दिया है। इसमें नई टिकटों पर खर्च किए गए ₹30,500 की वापसी, मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए मुआवजा तथा मुकदमे के खर्च की राशि शामिल है।
आयोग के अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य शेखर चंद्र की पीठ ने कहा कि एयरलाइन और यात्रा एजेंसी दोनों के पास यात्रियों का सही ईमेल पता उपलब्ध था। ऐसे में उड़ान के समय में बदलाव जैसी महत्वपूर्ण सूचना यात्रियों तक समय पर और सही माध्यम से पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी थी। आयोग ने माना कि सूचना ठीक से नहीं मिलने के कारण यात्रियों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ी।
मामला दो यात्रियों से जुड़ा है, जिन्होंने यात्रा एजेंसी के माध्यम से लंदन से दिल्ली लौटने की टिकट बुक कराई थी। उनकी वापसी की उड़ान पहले सुबह 11:45 बजे निर्धारित थी। यात्रियों के अनुसार, वे सुबह 9:43 बजे हवाईअड्डे पहुंच गए थे और निर्धारित समय के भीतर एयरलाइन के काउंटर पर भी पहुंचकर रिपोर्ट कर चुके थे।
हालांकि, उन्हें विमान में सवार होने की अनुमति नहीं दी गई। यात्रियों को बताया गया कि उड़ान का समय बदलकर सुबह 10:45 बजे कर दिया गया था और वे नई समय-सारणी के अनुसार देर से पहुंचे थे। यात्रियों का कहना था कि उन्हें उड़ान के समय में बदलाव की कोई जानकारी नहीं मिली थी। इसलिए वे मूल समय के आधार पर हवाईअड्डे पहुंचे थे।
बोर्डिंग नहीं मिलने के बाद यात्रियों के सामने भारत लौटने के लिए नई टिकट खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। उन्होंने आयोग को बताया कि वे ब्रिटेन में अपने पर्यटक वीजा के तहत निर्धारित छह महीने की अवधि से अधिक नहीं रुकना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने अतिरिक्त रकम खर्च कर नई टिकटें खरीदीं और भारत लौटने की व्यवस्था की।
भारत आने के बाद यात्रियों को पता चला कि उड़ान के समय में बदलाव से संबंधित सूचना कथित तौर पर उनके सही ईमेल पते के बजाय किसी गलत ईमेल पते पर भेजी गई थी। इसके बाद उन्होंने एयरलाइन और यात्रा एजेंसी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई और आर्थिक नुकसान तथा मानसिक परेशानी के लिए मुआवजे की मांग की।
सुनवाई के दौरान एयरलाइन ने जिम्मेदारी से इनकार करते हुए कहा कि टिकट यात्रा एजेंसी के माध्यम से बुक की गई थी। एयरलाइन ने यह भी तर्क दिया कि किसी तीसरे पक्ष द्वारा गलत जानकारी प्रदर्शित या उपलब्ध कराए जाने पर उसका नियंत्रण नहीं था। दूसरी ओर, यात्रा एजेंसी ने कहा कि उड़ान के संचालन और उसके समय में बदलाव पर उसका कोई नियंत्रण नहीं था।
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने पाया कि यात्रियों का सही ईमेल पता एयरलाइन और यात्रा एजेंसी दोनों के पास मौजूद था। ऐसे में उड़ान के बदले हुए समय की महत्वपूर्ण सूचना यात्रियों तक समय रहते पहुंचाना आवश्यक था।
आयोग ने कहा कि सूचना संबंधी चूक के कारण यात्रियों को नई टिकटें महंगी कीमत पर खरीदनी पड़ीं, हवाईअड्डे से वापस लौटना पड़ा और ब्रिटेन में संभावित अतिरिक्त ठहराव से बचने के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक उत्पीड़न दोनों का सामना करना पड़ा।
आदेश के तहत एयरलाइन को यात्रियों द्वारा नई टिकटों पर खर्च किए गए ₹30,500 वापस करने होंगे। इसके अलावा एयरलाइन और यात्रा एजेंसी को मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए दोनों शिकायतकर्ताओं को ₹50,000-₹50,000 का भुगतान करना होगा।
मुकदमे के खर्च के रूप में भी एयरलाइन और यात्रा एजेंसी को ₹25,000-₹25,000 देने का निर्देश दिया गया है। इस तरह यात्रियों को कुल ₹1.8 लाख की राहत मिलेगी।
आयोग के फैसले से यह स्पष्ट है कि उड़ान, टिकट या यात्रा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव होने पर एयरलाइन और यात्रा एजेंसी केवल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बच नहीं सकतीं। खासकर तब, जब दोनों के पास यात्री से संपर्क करने की सही जानकारी उपलब्ध हो।
यह मामला यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उड़ान के समय में मामूली बदलाव भी गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है। विशेष रूप से तब, जब यात्री पहले से मूल समय के अनुसार हवाईअड्डे पहुंच चुके हों या उनके विदेश में रहने की अवधि वीजा की समयसीमा से जुड़ी हो। ऐसी स्थिति में समय पर और सही सूचना देना सेवा प्रदाताओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है।
उपभोक्ता सेवा से जुड़ी शिकायतों के लिए यात्री संबंधित उपभोक्ता आयोग का रुख कर सकते हैं। उपभोक्ता शिकायतों के संबंध में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के माध्यम से भी सहायता ली जा सकती है।
