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Home»Development»दो एआई शोधकर्ताओं के इस्तीफे से वैश्विक बाजारों में भूचाल, निवेशकों की करीब ₹23 लाख करोड़ संपत्ति स्वाहा
Development

दो एआई शोधकर्ताओं के इस्तीफे से वैश्विक बाजारों में भूचाल, निवेशकों की करीब ₹23 लाख करोड़ संपत्ति स्वाहा

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJune 23, 2026No Comments5 Mins Read
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एआई प्रतिभाओं के पलायन, चिप मांग और भारी तकनीकी निवेश को लेकर बढ़ी चिंताओं से वैश्विक बाजारों में बिकवाली; एआई बूम पर पुनर्विचार के बीच दक्षिण कोरिया सबसे अधिक प्रभावित
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नई दिल्ली। मंगलवार को वैश्विक प्रौद्योगिकी शेयरों में आई तेज गिरावट ने यह दिखा दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उद्योग से जुड़ी खबरें अब दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को किस हद तक प्रभावित कर सकती हैं। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट से जुड़े दो प्रमुख एआई शोधकर्ताओं के कंपनी छोड़ने की खबर ने देखते ही देखते एक व्यापक बाजार गिरावट का रूप ले लिया, जिससे निवेशकों की अनुमानित ₹23 लाख करोड़ की संपत्ति बाजार से साफ हो गई और वॉल स्ट्रीट से लेकर एशिया तक निवेशकों में बेचैनी फैल गई।

पहली नजर में यह खबर सामान्य लग सकती थी। तकनीकी क्षेत्र में कर्मचारियों का एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाना कोई असामान्य बात नहीं है। लेकिन निवेशकों ने इस घटनाक्रम को अलग नजरिए से देखा क्योंकि एआई की वैश्विक दौड़ अब केवल तकनीक की नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की लड़ाई बन चुकी है। उद्योग के शीर्ष शोधकर्ता और वैज्ञानिक किसी भी कंपनी की भविष्य की प्रतिस्पर्धी क्षमता तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जैसे ही इन शोधकर्ताओं के अल्फाबेट छोड़ने की खबर सामने आई, कंपनी के शेयरों पर दबाव बढ़ गया। निवेशकों को चिंता सताने लगी कि कहीं कंपनी एआई क्षेत्र में अपनी बढ़त बनाए रखने में कमजोर तो नहीं पड़ रही। यही चिंता जल्द ही पूरे तकनीकी क्षेत्र में फैल गई और एआई आधारित विकास की कहानी पर सवाल उठने लगे।

अमेजन, मेटा और अन्य एआई-केंद्रित कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली देखी गई। निवेशक भविष्य की आय, प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त और एआई पर हो रहे भारी निवेश से मिलने वाले संभावित रिटर्न का पुनर्मूल्यांकन करने लगे। इसका असर नैस्डैक सहित कई प्रमुख वैश्विक सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

हालांकि सबसे बड़ा झटका दक्षिण कोरिया को लगा, जो पिछले दो वर्षों में एआई बूम का प्रमुख लाभार्थी रहा है। सेमीकंडक्टर दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स ने एआई सर्वर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों में इस्तेमाल होने वाली उन्नत मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग के कारण जबरदस्त लाभ कमाया था।

निवेशकों की चिंता तब और बढ़ गई जब रिपोर्ट सामने आई कि एसके हाइनिक्स अपनी अगली पीढ़ी की हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स के उत्पादन विस्तार की गति में बदलाव कर रही है। एआई उद्योग में HBM चिप्स को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इन्हें इस क्षेत्र की सबसे लाभदायक तकनीकों में गिना जाता है।

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हालांकि विश्लेषकों का मानना था कि कंपनी का यह कदम मुनाफे और बाजार रणनीति से जुड़ा हुआ है, न कि एआई मांग में कमजोरी का संकेत। फिर भी बाजार ने इसे अलग तरीके से लिया। निवेशकों को लगा कि शायद एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा तेज खर्च आने वाले समय में धीमा पड़ सकता है। इसी धारणा ने सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी मुनाफावसूली को जन्म दिया।

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स दोनों के शेयरों में दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिससे दक्षिण कोरिया का व्यापक शेयर बाजार भी दबाव में आ गया। कोस्पी सूचकांक में तेज गिरावट आई और कुछ ही घंटों में निवेशकों की अनुमानित ₹21 लाख करोड़ से ₹23 लाख करोड़ तक की संपत्ति बाजार से गायब हो गई।

निवेशकों की चिंता का एक और कारण एआई क्षेत्र में हो रहा अभूतपूर्व पूंजी निवेश है। हाल के महीनों में कई वैश्विक तकनीकी कंपनियों ने डेटा सेंटर, चिप निर्माण, क्लाउड सेवाओं और एआई विकास परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर की फंडिंग जुटाई है या जुटाने की योजना बनाई है।

हालांकि यह निवेश एआई के दीर्घकालिक भविष्य में विश्वास को दर्शाता है, लेकिन अब कुछ निवेशक यह सवाल उठा रहे हैं कि कहीं खर्च जरूरत से ज्यादा तो नहीं हो रहा। बाजार में यह चिंता बढ़ रही है कि क्या इन विशाल निवेशों पर भविष्य में अपेक्षित रिटर्न मिल पाएगा।

इसका असर भारत में भी महसूस किया गया। भले ही भारतीय कंपनियां सीधे तौर पर दक्षिण कोरिया के चिप निर्माताओं पर निर्भर नहीं हैं, लेकिन वैश्विक संस्थागत निवेशक जोखिम बढ़ने पर कई बाजारों में एक साथ अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं। परिणामस्वरूप भारतीय शेयर बाजार में भी विशेष रूप से आईटी और मेटल शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट एआई क्रांति के अंत का संकेत नहीं है। बल्कि यह उस संवेदनशीलता को दर्शाती है जो पिछले दो वर्षों में एआई शेयरों में आई असाधारण तेजी के बाद विकसित हुई है। जब कोई क्षेत्र 100%, 200% या उससे अधिक की तेजी दिखाता है, तब अपेक्षाकृत छोटी खबरें भी बड़े बाजार उतार-चढ़ाव का कारण बन सकती हैं।

यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि आज की परस्पर जुड़ी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में कुछ प्रमुख कंपनियों या चुनिंदा व्यक्तियों से जुड़ी खबरें भी दुनिया भर के निवेशकों की सोच और बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। एआई अभी भी वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विकास विषयों में से एक बना हुआ है, लेकिन हालिया घटनाओं ने यह भी दिखा दिया है कि प्रतिभा, निवेश और भविष्य की वृद्धि को लेकर उठने वाले सवाल कितनी तेजी से बाजार की धारणा बदल सकते हैं।

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