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Home»Education»री-नीट परीक्षा के दिन 44 मेडिकल छात्र गायब, बढ़ीं सॉल्वर नेटवर्क से जुड़ाव की आशंकाएं; पुलिस खंगाल रही कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा
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री-नीट परीक्षा के दिन 44 मेडिकल छात्र गायब, बढ़ीं सॉल्वर नेटवर्क से जुड़ाव की आशंकाएं; पुलिस खंगाल रही कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJune 23, 2026No Comments4 Mins Read
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परीक्षा में प्रतिरूपण रोकने के लिए आयोजित अनिवार्य विशेष कक्षाओं से अनुपस्थित मिले दर्जनों एमबीबीएस छात्र; जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल में जुटीं, फिलहाल किसी प्रत्यक्ष भूमिका की पुष्टि नहीं।
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मुजफ्फरपुर। NEET री-एग्जाम 2026 की निष्पक्षता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। बिहार के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज से 44 छात्रों के परीक्षा वाले दिन अनुपस्थित पाए जाने के बाद जांच एजेंसियों ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। यह घटनाक्रम हाल ही में लखीसराय में सामने आए कथित सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद सामने आया है, जिसके चलते अधिकारियों ने दोनों मामलों के बीच संभावित संबंधों की जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 21 जून को आयोजित NEET पुनर्परीक्षा के दिन मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) के 44 छात्र विशेष शैक्षणिक सत्रों में उपस्थित नहीं थे। इन सत्रों का आयोजन इस उद्देश्य से किया गया था कि मेडिकल छात्र किसी भी प्रकार की सॉल्वर गतिविधि या प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) में शामिल न हो सकें।

परीक्षा में संभावित धांधली को रोकने के लिए अधिकारियों ने सभी मेडिकल कॉलेजों को विशेष कक्षाएं आयोजित करने और उपस्थिति का रिकॉर्ड बनाए रखने के निर्देश दिए थे। SKMCH में लगभग 480 छात्रों की उपस्थिति अपेक्षित थी और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। इसके बावजूद 44 छात्रों की अनुपस्थिति ने जांच एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

मामले ने इसलिए भी गंभीरता हासिल की है क्योंकि हाल ही में बिहार में एक कथित सॉल्वर सिंडिकेट का खुलासा हुआ था, जिसमें कुछ लोगों पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के आरोप लगे थे। अब जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि छात्रों की अनुपस्थिति महज संयोग थी या इसके पीछे किसी संगठित परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अनुपस्थित छात्रों के पास वैध कारण हो सकते हैं। प्रारंभिक स्पष्टीकरण में कुछ छात्रों के पारिवारिक कार्यक्रमों, स्वास्थ्य संबंधी कारणों अथवा ग्रीष्मावकाश के चलते कॉलेज से बाहर होने की बात कही गई है। हालांकि जांच एजेंसियां इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन कर रही हैं।

जांच के तहत पुलिस ने सभी अनुपस्थित छात्रों के नाम, पते और मोबाइल नंबर एकत्र कर लिए हैं। अब उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन और परीक्षा दिवस के दौरान संचार गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि उनकी वास्तविक गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

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सूत्रों के अनुसार, अनुपस्थित छात्रों में अधिकांश एमबीबीएस के द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थी हैं। जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इनमें से कोई छात्र परीक्षा केंद्रों के आसपास मौजूद था या उसका संपर्क उन लोगों से हुआ था जो पहले से कथित सॉल्वर रैकेट की जांच के दायरे में हैं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया है जो अनुपस्थित छात्रों को परीक्षा धोखाधड़ी से जोड़ता हो। जांच का उद्देश्य तथ्यों का सत्यापन करना और किसी भी संभावित संगठित अनियमितता की संभावना को खारिज या स्थापित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर नेटवर्क अब अधिक संगठित और तकनीकी रूप ले चुके हैं। ऐसे नेटवर्क अक्सर प्रतिभाशाली छात्रों को दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठाने का प्रयास करते हैं और पहचान सत्यापन प्रणालियों की कमजोरियों का लाभ उठाते हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े संगठित गिरोह अक्सर पहचान सत्यापन और मानवीय निगरानी की कमजोर कड़ियों का फायदा उठाते हैं। उनके अनुसार, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, रियल-टाइम फेस रिकग्निशन, डिजिटल ऑडिट ट्रेल और उन्नत निगरानी तंत्र जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।

फिलहाल जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारियों का विश्लेषण कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रों की अनुपस्थिति के पीछे सामान्य कारण थे या फिर यह मामला किसी बड़े परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क की ओर संकेत करता है। यह घटनाक्रम एक बार फिर दर्शाता है कि देश की प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।

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