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Home»Policy Watch»FCRA नियमों में बड़ा बदलाव: विदेशी फंड लेने वाले NGOs के लिए सख्त खुलासे अनिवार्य, सोशल मीडिया और खर्च का ब्योरा भी देना होगा
Policy Watch

FCRA नियमों में बड़ा बदलाव: विदेशी फंड लेने वाले NGOs के लिए सख्त खुलासे अनिवार्य, सोशल मीडिया और खर्च का ब्योरा भी देना होगा

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJune 24, 2026No Comments4 Mins Read
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गृह मंत्रालय ने संशोधित किए विदेशी अंशदान नियम; विदेशी फंड के उपयोग, उद्देश्य, संचालन क्षेत्र और प्रमुख पदाधिकारियों को लेकर बढ़ी जवाबदेही
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA), 2010 के तहत गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा विदेशी धन प्राप्त करने और उसके उपयोग से संबंधित नियमों में व्यापक संशोधन किए हैं। नए नियमों के तहत अब विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों को अपने सोशल मीडिया खातों, संचालन क्षेत्रों, गतिविधियों के उद्देश्य और वित्तीय उपयोग से जुड़ी अधिक विस्तृत जानकारी सरकार को देनी होगी।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, संशोधनों का उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी को मजबूत करना है। इसके साथ ही विभिन्न उल्लंघनों के लिए जुर्माने की राशि और दंडात्मक प्रावधानों को भी संशोधित किया गया है।

नए नियमों के तहत अब किसी भी संगठन को FCRA पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय यह स्पष्ट करना होगा कि वह विदेशी फंड किस उद्देश्य से प्राप्त करना चाहता है और किन राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में अपनी गतिविधियां संचालित करेगा। इसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित सूची में से ही उद्देश्यों का चयन करना होगा। ये उद्देश्य धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से संबंधित हो सकते हैं।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय मूल के व्यक्तियों को छोड़कर विदेशी नागरिक यदि किसी संगठन के प्रमुख पदाधिकारी हैं, तो ऐसे संगठनों को सामान्यतः FCRA पंजीकरण या पूर्व अनुमति देने पर विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार अलग आदेश जारी कर छूट दे सकती है।

संशोधित नियमों के अनुसार, विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों को अब अपने सोशल मीडिया खातों का विवरण भी आवेदन में देना होगा। इसके अलावा वार्षिक रिटर्न के साथ विस्तृत गतिविधि रिपोर्ट जमा करना भी अनिवार्य किया गया है।

सरकार ने FCRA नियमों में “प्रमुख पदाधिकारी” की परिभाषा का भी विस्तार किया है। अब इसमें कंपनी निदेशक, साझेदारी फर्म के भागीदार, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के कर्ता और संगठन के प्रबंधन पर नियंत्रण रखने वाले अन्य व्यक्ति भी शामिल होंगे।

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धार्मिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों के लिए भी नए प्रावधान जोड़े गए हैं। धार्मिक शिक्षा, आस्था संबंधी परंपराओं के दस्तावेजीकरण और स्वदेशी या जनजातीय धार्मिक परंपराओं के संरक्षण जैसी गतिविधियों को अनुमति दी गई है, लेकिन इन श्रेणियों में धर्म परिवर्तन (Proselytisation) को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।

गृह मंत्रालय ने निष्क्रिय संगठनों पर भी नियंत्रण कड़ा किया है। नए नियमों के अनुसार, किसी संगठन को अपने चुने गए उद्देश्यों पर पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम से कम ₹10 लाख विदेशी अंशदान खर्च करना होगा। ऐसा न करने पर पंजीकरण के नवीनीकरण या जारी रहने में कठिनाई आ सकती है।

यदि किसी संगठन को “पूर्व अनुमति” (Prior Permission) के तहत विदेशी धन प्राप्त होता है, तो अगली किस्त जारी होने से पहले उसे पिछली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग करना होगा। सरकार उपयोग की पुष्टि के लिए क्षेत्रीय जांच भी कर सकेगी।

इसके अलावा यदि विदेशी धन किसी मध्यस्थ भुगतान व्यवस्था या “डोनर एडवाइज्ड फंड” के माध्यम से प्राप्त होता है, तो संगठन को धन के वास्तविक स्रोत या मूल दाता की जानकारी भी देनी होगी।

सरकार ने विभिन्न उल्लंघनों के लिए दंड भी बढ़ाए हैं। प्रशासनिक खर्च की निर्धारित सीमा से अधिक विदेशी धन खर्च करने, सट्टा गतिविधियों में निवेश करने या निर्धारित उद्देश्य के अतिरिक्त अन्य प्रयोजनों में विदेशी धन उपयोग करने पर ₹1 लाख या संबंधित राशि के एक निर्धारित प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। कुछ मामलों में निवेश से अर्जित पूरी आय की वसूली का भी प्रावधान किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों से विदेशी वित्तपोषण प्राप्त करने वाले संगठनों पर निगरानी और अनुपालन संबंधी दायित्व बढ़ेंगे। वहीं सरकार का कहना है कि नए नियम विदेशी अंशदान के उपयोग को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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