झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी में मिनर्वा चौराहे के पास व्यापारी के मुंशी से ₹24.90 लाख की लूट के मामले में पुलिस ने कथित साजिश का खुलासा करते हुए दो पुलिसकर्मियों समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित मास्टरमाइंड ऑनलाइन सट्टे में भारी आर्थिक नुकसान और कर्ज के दबाव में था, जिसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कार और ₹24.50 लाख नकद बरामद कर लिए हैं, जबकि शेष ₹40,000 की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।
पुलिस के अनुसार, जांच में सूर्यश यादव को कथित साजिशकर्ता के रूप में चिन्हित किया गया है। आरोप है कि वह ऑनलाइन सट्टेबाजी में लगातार नुकसान उठाने के कारण आर्थिक संकट में था। इसी दौरान उसने कथित रूप से नितिन तेजवानी और संस्कार तेजवानी, जो कथित तौर पर सट्टा नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं, के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई। इसके बाद उसने अपने सहयोगियों सुखबीर और सूरज सिंह को भी कथित साजिश में शामिल किया।
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने जालौन पुलिस लाइन में तैनात सिपाही राघवेंद्र राजपूत से संपर्क किया। आरोप है कि राघवेंद्र ने इस वारदात के लिए दो अन्य सिपाहियों मनोज और नीरज को भी शामिल कर लिया। पुलिस का आरोप है कि सरकारी वर्दी का उपयोग कर पीड़ित को भ्रमित करने और घटना को वैध पुलिस कार्रवाई जैसा दिखाने की योजना बनाई गई थी।
पुलिस के अनुसार, 9 जुलाई को सूरत के कारोबारी जितेंद्र पटेल के मुंशी किशन पांचाल लगभग ₹24.90 लाख की नकदी लेकर जा रहे थे। इसी दौरान मिनर्वा चौराहे के पास आरोपियों ने कथित रूप से लूट की घटना को अंजाम दिया। हालांकि, घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की।
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जांच के दौरान पुलिस ने जालौन पुलिस लाइन में तैनात सिपाही राघवेंद्र राजपूत, सिपाही मनोज तथा अन्य आरोपियों सहित कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कार और ₹24.50 लाख नकद भी बरामद कर लिया है। मामले में कथित रूप से शामिल एक अन्य सिपाही नीरज अभी फरार है, जिसकी तलाश के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
पुलिस ने बताया कि मामले में नाम सामने आने के बाद तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। साथ ही पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका, आपराधिक साजिश और अन्य संभावित सहयोगियों की भी जांच की जा रही है।
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कथित मास्टरमाइंड का संबंध एक ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि सट्टेबाजी से जुड़े वित्तीय लेनदेन किस प्रकार संचालित किए जा रहे थे और क्या जीत-हार की रकम हवाला चैनलों के माध्यम से स्थानांतरित की जाती थी। जांच एजेंसियां बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध डिजिटल नेटवर्क अक्सर वित्तीय अपराधों, हवाला लेनदेन और संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े पाए जाते हैं। उनके अनुसार, मोबाइल फोरेंसिक, बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड, सीसीटीवी विश्लेषण और कॉल डिटेल रिकॉर्ड जैसे तकनीकी साक्ष्य इस प्रकार के मामलों में पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से दूर रहना और किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना समय पर संबंधित एजेंसियों को देना आवश्यक है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी, शेष नकदी की बरामदगी तथा कथित सट्टा और हवाला नेटवर्क की जांच जारी है। जांच के दौरान यदि अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता या अतिरिक्त वित्तीय लेनदेन के प्रमाण सामने आते हैं, तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
