कानपुर/लखनऊ: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण के कुछ हिस्सों में सड़क धंसने की समस्या ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्सों के कारण प्राधिकरण को प्रतिदिन करीब ₹42 लाख के टोल राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। अब इस वित्तीय नुकसान की भरपाई के साथ सड़क को दोबारा दुरुस्त करने में आने वाला पूरा खर्च निर्माण करने वाली कंपनी PNC से वसूलने की तैयारी की जा रही है। कंपनी को भविष्य के कार्यों से डिबार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इसके साथ ही एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता की देखरेख करने वाली जयपुर की थीम इंजीनियरिंग कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हो गई है। संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सड़क के धंसने और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े मामलों की जांच के बीच NHAI अब जिम्मेदारी तय करने में जुटा है।
चार स्थानों पर 1,600 मीटर सड़क धंसी
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के 45 किलोमीटर लंबे पैकेज-2 में उन्नाव और असोहा के आसपास चार स्थानों पर सड़क धंसने की समस्या सामने आई है। इन सभी स्थानों को मिलाकर करीब 1,600 मीटर लंबा हिस्सा प्रभावित हुआ है। सड़क के दबने से वहां बने व्हील ट्रैक में तेज रफ्तार वाहनों के लहराने की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे यातायात सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
सड़क की संरचना में आए इस बदलाव का असर वाहनों की आवाजाही और एक्सप्रेसवे के संचालन पर पड़ा है। NHAI की ओर से प्रभावित हिस्सों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और निर्माण कंपनी की जवाबदेही तय करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
निर्माण कंपनी पर दोहरी जिम्मेदारी
सड़क के धंसने से होने वाले राजस्व नुकसान और मरम्मत पर आने वाले खर्च का भार निर्माण कंपनी पर डालने की तैयारी है। NHAI के अनुसार, एक्सप्रेसवे को निर्धारित मानकों के अनुरूप दुरुस्त कराने के साथ टोल राजस्व में हुए नुकसान की भरपाई भी निर्माण एजेंसी से कराई जाएगी।
PNC के खिलाफ भविष्य के सरकारी कार्यों के लिए डिबार करने की प्रक्रिया शुरू किया जाना भी कार्रवाई का अहम हिस्सा है। वहीं, निर्माण कार्य की निगरानी करने वाली थीम इंजीनियरिंग की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। सुपरविजन में कथित कमी को देखते हुए कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
₹4,200 करोड़ की परियोजना
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 63 किलोमीटर है। परियोजना को दो प्रमुख पैकेज में विकसित किया गया है। पहला पैकेज करीब 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड हिस्सा है, जिसकी निर्माण लागत लगभग ₹2,000 करोड़ बताई गई है। दूसरा पैकेज 45 किलोमीटर लंबा है और इसकी लागत करीब ₹1,513 करोड़ है।
भूमि अधिग्रहण समेत परियोजना की कुल लागत करीब ₹4,200 करोड़ तक पहुंचती है। ऐसे में निर्माण के बाद सड़क की गुणवत्ता और लंबे समय तक उसकी उपयोगिता बनाए रखना परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर हुआ निर्माण
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया गया है। इस मॉडल में परियोजना की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा NHAI की ओर से और 60 प्रतिशत निजी डेवलपर की ओर से लगाया जाता है। बाद में सरकार निजी डेवलपर के निवेश की राशि को ब्याज और रखरखाव लागत के साथ करीब 15 से 20 वर्षों की अवधि में किस्तों के जरिए लौटाती है।
इस व्यवस्था में निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि परियोजना की दीर्घकालिक लागत और प्रदर्शन सीधे तौर पर इससे जुड़े होते हैं। सड़क धंसने की घटना के बाद निर्माण और निगरानी से जुड़ी एजेंसियां जांच के दायरे में आ गई हैं।
टोल वसूली पर भी असर
एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली की जिम्मेदारी सहकारी ग्लोबल कंपनी को दी गई है। सड़क के प्रभावित हिस्सों और यातायात व्यवस्था पर पड़ रहे असर के कारण टोल संग्रह प्रभावित होने की बात सामने आई है। NHAI को प्रतिदिन करीब ₹42 लाख के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान इसी पृष्ठभूमि में लगाया गया है।
अब प्राधिकरण के सामने सड़क को जल्द सुरक्षित स्थिति में लाने के साथ नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने की चुनौती है। निर्माण और सुपरविजन एजेंसियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई से यह संकेत भी गया है कि परियोजना में सामने आई तकनीकी खामियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। सड़क धंसने के वास्तविक कारण और मरम्मत की अंतिम लागत विस्तृत तकनीकी जांच के बाद स्पष्ट होगी।
