नई दिल्ली: फोर्ब्स एशिया ने अपनी प्रतिष्ठित ‘बेस्ट अंडर ए बिलियन’ (Best Under a Billion) सूची का 25वां संस्करण जारी कर दिया है। इस वर्ष की सूची में भारत ने 27 कंपनियों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है, जबकि 28 कंपनियों के साथ चीन पहले स्थान पर बना हुआ है। यह सूची एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उन सूचीबद्ध कंपनियों को सम्मानित करती है जिन्होंने अपेक्षाकृत छोटे आकार के बावजूद मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, स्थिर वृद्धि और बेहतर कॉरपोरेट संचालन का प्रदर्शन किया है।
फोर्ब्स के अनुसार, इस वर्ष की सूची में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 19,000 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें से विभिन्न वित्तीय और परिचालन मानकों के आधार पर 200 कंपनियों का चयन किया गया। भारत भले ही पिछले दो वर्षों की तुलना में इस बार कम कंपनियों के साथ सूची में शामिल हुआ है, लेकिन फिर भी उसने दूसरा स्थान बरकरार रखा है। वर्ष 2024 और 2023 में भारत की 30-30 कंपनियां इस सूची का हिस्सा थीं, जबकि इस वर्ष यह संख्या 27 रही।
अन्य देशों की बात करें तो जापान और ताइवान की 22-22 कंपनियों ने सूची में स्थान बनाया है। मलेशिया की 19 कंपनियां चयनित हुई हैं, जबकि पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और न्यूजीलैंड जैसे देशों की पांच से कम कंपनियां ही इस प्रतिष्ठित सूची में जगह बना सकीं। इससे एशिया के उभरते औद्योगिक और तकनीकी परिदृश्य में भारत की मजबूत स्थिति का संकेत मिलता है।
फोर्ब्स ने स्पष्ट किया है कि इस सूची के लिए केवल राजस्व या बाजार पूंजीकरण को आधार नहीं बनाया जाता। चयन प्रक्रिया में कंपनी की वित्तीय मजबूती, कर्ज का स्तर, उत्पादों और सेवाओं की बिक्री, एक और तीन वर्ष की प्रति शेयर आय (EPS) में वृद्धि, एक और पांच वर्ष के औसत रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) तथा अन्य प्रमुख वित्तीय संकेतकों का व्यापक विश्लेषण किया जाता है। इन कड़े मानकों पर खरा उतरने वाली कंपनियों को ही सूची में स्थान मिलता है।
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रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष सूची में शामिल लगभग 25 प्रतिशत कंपनियां सॉफ्टवेयर, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक प्रमुख कंपोनेंट्स की आपूर्ति से जुड़ी हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन (EV), नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक इंजीनियरिंग और विशेष तकनीकी सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों ने भी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई है। यह प्रवृत्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन और उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
भारत की जिन प्रमुख कंपनियों ने इस वर्ष सूची में स्थान बनाया है उनमें Acutaas Chemicals, Advait Energy Transitions, AGI Infra, OrionPro Solutions, Azad Engineering, BSE, CCL Products, Inox India, Gravita India, eClerx Services, Banco Products, Ceinsys Tech, HBL Engineering, InfoBeans Technologies, Man Industries, Netweb Technologies India और NGL Fine-Chem सहित कई अन्य कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों का चयन विभिन्न क्षेत्रों में उनके वित्तीय प्रदर्शन, नवाचार, निरंतर विकास और प्रतिस्पर्धी क्षमता के आधार पर किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सूची में भारतीय कंपनियों की मजबूत मौजूदगी यह दर्शाती है कि देश का मध्यम आकार का कॉरपोरेट क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, ऊर्जा, विशेष रसायन, आईटी सेवाएं और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही हैं।
फोर्ब्स ने यह भी उल्लेख किया है कि अतीत में इस सूची में शामिल कई कंपनियां आगे चलकर वैश्विक उद्योग जगत की अग्रणी कंपनियों में शामिल हुईं। भारत की Infosys, Wipro और Biocon जैसी कंपनियां भी पहले इस सूची का हिस्सा रह चुकी हैं और बाद में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय पहचान बनाई। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा सूची में शामिल कई भारतीय कंपनियां भी आने वाले वर्षों में देश की विनिर्माण क्षमता, प्रौद्योगिकी नवाचार, निर्यात वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
