मुंबई: मुंबई की एसी उपनगरीय लोकल ट्रेन सेवा में फर्जी डिजिटल टिकट के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन सतर्क हो गया है। पश्चिम रेलवे ने टिकट जांच अभियान के दौरान एक यात्री को कथित रूप से नकली UTS मोबाइल टिकट के साथ यात्रा करते हुए पकड़ा। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यात्री ने एक फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर ऐसा टिकट तैयार किया था, जो देखने में भारतीय रेलवे के आधिकारिक टिकटिंग प्लेटफॉर्म जैसा प्रतीत हो रहा था। मामले में मुंबई सेंट्रल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मामला उस समय सामने आया जब मुंबई सेंट्रल मंडल के टिकट जांच अभियान के दौरान एक यात्री ने अपने मोबाइल फोन पर विरार से चर्चगेट के बीच का एसी लोकल का रिटर्न ई-टिकट दिखाया। पहली नजर में टिकट सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन टिकट प्रदर्शित करने वाला मोबाइल ऐप आधिकारिक RailOne एप्लिकेशन जैसा दिखने के बावजूद उसमें कुछ तकनीकी असामान्यताएं दिखाई दीं। इससे टिकट जांच दल को संदेह हुआ और विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया शुरू की गई।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि टिकट पर प्रदर्शित UTS नंबर संबंधित यात्रा से मेल नहीं खा रहा था। सत्यापन में सामने आया कि यह नंबर वास्तव में पहले जारी किए गए एक पुराने द्वितीय श्रेणी (सेकंड क्लास) टिकट का था, जबकि मोबाइल स्क्रीन पर उसे एसी लोकल ट्रेन के टिकट के रूप में दिखाया जा रहा था। इससे स्पष्ट हुआ कि टिकट डिजिटल रूप से तैयार किया गया जाली दस्तावेज था।
पूछताछ के दौरान यात्री ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसने यह फर्जी मोबाइल ऐप यूट्यूब पर साझा किए गए एक लिंक के माध्यम से डाउनलोड किया था। उसी ऐप का इस्तेमाल कर उसने नकली टिकट तैयार किया और यात्रा के दौरान उसे वास्तविक टिकट के रूप में प्रस्तुत किया। अधिकारियों का मानना है कि यह तरीका यात्रियों को धोखा देने के लिए आधिकारिक रेलवे एप्लिकेशन की डिजाइन और स्वरूप की नकल कर तैयार किया गया हो सकता है।
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घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि वे केवल भारतीय रेलवे के आधिकारिक डिजिटल टिकटिंग प्लेटफॉर्म, जैसे UTS और RailOne, का ही उपयोग करें। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अनजान वेबसाइट, सोशल मीडिया पोस्ट, यूट्यूब लिंक या थर्ड-पार्टी स्रोत से रेलवे टिकटिंग ऐप डाउनलोड करना गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है और इससे यात्री साइबर धोखाधड़ी या कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकते हैं।
रेलवे ने यह भी संकेत दिया है कि मुंबई की एसी लोकल ट्रेनों में डिजिटल टिकटों के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए टिकट जांच व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान डिजिटल टिकटों की तकनीकी जांच, QR कोड और UTS नंबर का वास्तविक रिकॉर्ड से मिलान तथा संदिग्ध मोबाइल एप्लिकेशन की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर लोकप्रिय सरकारी सेवाओं की नकल करने वाले फर्जी ऐप बनाकर लोगों को निशाना बनाते हैं। उनके अनुसार किसी भी सरकारी सेवा से जुड़ा मोबाइल ऐप केवल अधिकृत ऐप स्टोर या संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से ही डाउनलोड करना चाहिए। यदि कोई ऐप यूट्यूब, मैसेजिंग लिंक या अज्ञात वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा हो, तो उसे डाउनलोड करने से बचना चाहिए।
रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि टिकट खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वे अधिकृत प्लेटफॉर्म का ही उपयोग कर रहे हैं। यदि किसी ऐप या टिकट की प्रामाणिकता को लेकर संदेह हो, तो तुरंत रेलवे अधिकारियों को सूचित करें। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल टिकटिंग प्रणाली यात्रियों की सुविधा के लिए विकसित की गई है, लेकिन फर्जी एप्लिकेशन और साइबर धोखाधड़ी से बचाव के लिए सतर्कता और आधिकारिक माध्यमों का उपयोग करना बेहद आवश्यक है।
