नई दिल्ली। सहारा समूह की सहकारी समितियों में वर्षों से फंसे पैसे की वापसी का इंतजार कर रहे लाखों जमाकर्ताओं के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल को दोबारा शुरू कर दिया है। इसके साथ करीब 20 लाख लंबित दावों की जांच और पात्र जमाकर्ताओं को भुगतान की प्रक्रिया फिर आगे बढ़ सकेगी। सरकार के मुताबिक, अब तक करीब 42 लाख जमाकर्ताओं को कुल ₹9,267 करोड़ वापस किए जा चुके हैं।
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, अब तक लौटाई गई रकम सीधे जमाकर्ताओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई है। पोर्टल के दोबारा सक्रिय होने के बाद तकनीकी, प्रशासनिक या दस्तावेज संबंधी कारणों से अटके दावों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य पात्र जमाकर्ताओं की पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके खातों में रकम भेजना है।
रिफंड प्रक्रिया क्यों रुकी थी?
सहारा समूह की संबंधित सहकारी समितियों के कामकाज में पिछले कुछ समय से कई तरह की तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं सामने आई थीं। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतें, जरूरी लाइसेंस, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों के रखरखाव तथा कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याएं शामिल थीं। इन कारणों से जमाकर्ताओं के दावों की जांच और भुगतान की रफ्तार प्रभावित हुई।
मंत्रालय के अनुसार, नवंबर 2025 में सहारा समितियों के कुछ परिसरों को ऐसे मामलों के चलते सील कर दिया गया था, जिनका इन समितियों से सीधा संबंध नहीं था। इससे समितियों के नियमित कामकाज पर असर पड़ा और रिफंड से जुड़े कार्य भी प्रभावित हुए। इसके बाद सहकारिता मंत्रालय ने हस्तक्षेप कर तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर कराया। अब पोर्टल दोबारा शुरू होने के साथ लंबित दावों पर काम आगे बढ़ाने की तैयारी है।
इन चार समितियों के जमाकर्ताओं को मिलेगा लाभ
रिफंड पोर्टल के जरिए सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के पात्र जमाकर्ताओं के दावों का निपटारा किया जा रहा है। इनमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी शामिल हैं।
यह रिफंड व्यवस्था जुलाई 2023 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य सहकारी समितियों में जमा रकम के वास्तविक और पात्र दावेदारों की पहचान कर उन्हें उनका पैसा वापस करना है। अब लंबित दावों के दोबारा सक्रिय होने से बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
कैसे होता है दावे का सत्यापन?
रिफंड की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और कागजरहित रखी गई है। आवेदन करने वाले जमाकर्ता की पहचान आधार के जरिए की जाती है। इसके बाद उसके नाम, सदस्यता संबंधी जानकारी और बैंक खाते के विवरण का संबंधित सहकारी समिति के रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है।
जमाकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए जमा प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच होती है। सभी विवरण सही पाए जाने और सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र राशि आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य गलत दावों को रोकने और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।
निवेशकों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?
सरकार ने जमाकर्ताओं से कहा है कि नया दावा दाखिल करने या पहले किए गए आवेदन में जरूरी सुधार के लिए केवल आधिकारिक सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल का इस्तेमाल करें। यदि पुराने आवेदन में किसी कमी या गलती की जानकारी दी गई है, तो उपलब्ध दोबारा दावा जमा करने की सुविधा के जरिए आवश्यक सुधार किया जा सकता है।
जमाकर्ताओं को गैर-अधिकृत वेबसाइटों, निजी एजेंटों और जल्द रिफंड दिलाने का दावा करने वाले लोगों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। आवेदन या दोबारा आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज, सही सदस्यता विवरण और बैंक खाते की जानकारी देना जरूरी है। गलत या अधूरी जानकारी देने पर सत्यापन में देरी हो सकती है।
अब तक ₹9,267 करोड़ लौटाए जा चुके हैं और करीब 42 लाख जमाकर्ताओं को इसका लाभ मिला है। पोर्टल के दोबारा शुरू होने से करीब 20 लाख लंबित दावों पर प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। लंबे समय से अपने पैसे की वापसी का इंतजार कर रहे जमाकर्ताओं के लिए यह कदम राहत की दिशा में अहम माना जा रहा है।
