नई दिल्ली: संकटग्रस्त एडटेक कंपनी Byju’s के संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर में एक और कानूनी झटका लगा है। सिंगापुर हाई कोर्ट ने अवमानना (Contempt of Court) के मामले में सुनाई गई छह महीने की जेल की सजा पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद यदि रवींद्रन सिंगापुर लौटते हैं तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने मई में दिए गए फैसले को सिंगापुर की कोर्ट ऑफ अपील में चुनौती दे रखी है और कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है।
रवींद्रन के विधि प्रतिनिधियों के अनुसार, हाई कोर्ट ने 9 जुलाई को सजा पर रोक लगाने की मांग को अस्वीकार कर दिया। इससे पहले मई 2026 में अदालत ने उन्हें न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में अगली सुनवाई तक इस आदेश पर अस्थायी रोक दी गई थी, लेकिन अब अदालत ने उस राहत को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
यह फैसला बायजू रवींद्रन के लिए ऐसे समय आया है जब वह दुनिया के कई देशों में निवेशकों और ऋणदाताओं की कानूनी कार्रवाइयों का सामना कर रहे हैं। कभी भारत के सबसे मूल्यवान स्टार्टअप्स में शामिल Byju’s ने तेज विस्तार के दौर में वैश्विक निवेशकों से अरबों डॉलर जुटाए थे, लेकिन बाद में वित्तीय संकट, कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े आरोपों, कर्मचारियों की छंटनी और नकदी संकट के कारण कंपनी गंभीर मुश्किलों में फंस गई।
रवींद्रन की ओर से पेश विधि फर्म Lazareff Le Bars के वकील जे. माइकल मैकनट ने कहा कि उनके मुवक्किल का मानना है कि उन्होंने जानबूझकर या अनजाने में किसी भी न्यायालयीय आदेश का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने कहा कि रवींद्रन उपलब्ध सभी वैधानिक उपायों का उपयोग करते हुए कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपना पक्ष रखते रहेंगे।
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वकील ने यह भी बताया कि बायजू रवींद्रन वर्तमान में सिंगापुर में नहीं हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि वह भविष्य में वहां यात्रा करेंगे या नहीं। उनके अनुसार, यदि भविष्य में रवींद्रन सिंगापुर जाने का निर्णय लेते हैं, तो वह उस समय अदालत में अपील से संबंधित आवश्यक कानूनी कदम उठा सकते हैं। फिलहाल अदालत का आदेश तभी प्रभावी होगा जब वह सिंगापुर की सीमा में प्रवेश करेंगे।
सिंगापुर में यह मामला Qatar Investment Authority (QIA) की एक सहायक कंपनी द्वारा दायर दावे से जुड़ा है। यह इकाई उस फंडिंग राउंड में निवेशक थी, जब बायजूज़ कर्मचारियों की छंटनी और लागत में कटौती कर रही थी। अदालत के ताजा फैसले के बाद क्यूआईए ने कहा है कि वह निर्णय का स्वागत करती है और रवींद्रन के खिलाफ उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का उपयोग जारी रखेगी।
सिंगापुर के अलावा अमेरिका में भी बायजू रवींद्रन और उनसे जुड़ी संस्थाओं पर कानूनी दबाव बना हुआ है। वहां ऋणदाता लगभग 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर के डिफॉल्ट हुए टर्म लोन से हुई कथित क्षति की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। इन मामलों में विभिन्न अदालतों में संपत्तियों, फंड फ्लो और कॉरपोरेट लेनदेन से जुड़े विवादों पर सुनवाई चल रही है।
बायजू रवींद्रन की कहानी कभी भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की सबसे बड़ी सफलता के रूप में देखी जाती थी। एक शिक्षक के रूप में करियर शुरू करने वाले रवींद्रन ने Think & Learn Pvt. Ltd. के माध्यम से Byju’s को वैश्विक स्तर की एडटेक कंपनी बनाया था। कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा की मांग बढ़ने से कंपनी का मूल्यांकन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद वित्तीय प्रबंधन, नियामकीय अनुपालन, निवेशकों के साथ विवाद और बढ़ते कर्ज ने कंपनी की स्थिति को लगातार कमजोर किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंगापुर हाई कोर्ट का यह निर्णय बायजू रवींद्रन की अंतरराष्ट्रीय कानूनी चुनौतियों को और जटिल बना सकता है। हालांकि अंतिम परिणाम उनकी लंबित अपीलों और विभिन्न देशों में चल रही न्यायिक कार्यवाहियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सिंगापुर में सुनाई गई छह महीने की जेल की सजा प्रभावी बनी हुई है और भविष्य में उनकी यात्रा तथा कानूनी रणनीति पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
