अहमदाबाद। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की Economic Offences Wing (EOW) ने ₹2.27 करोड़ के बड़े “रिकवरी स्कैम” का खुलासा करते हुए एक पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने कनाडा में हुए एक कथित फ्रॉड में फंसे पैसे वापस दिलाने का झांसा देकर पीड़ित से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिल भिखाभाई विभानी और उनकी पत्नी विम्मी के रूप में हुई है। जांच अधिकारियों के अनुसार, दोनों ने खुद को ऐसे प्रभावशाली मध्यस्थ के रूप में पेश किया जो विदेश में अटके बड़े फंड को वापस दिलाने में सक्षम हैं। इसी भरोसे के आधार पर पीड़ित को लगातार भुगतान करने के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि विदेश में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं और पैसा जल्द ही वापस मिल जाएगा। इसी बहाने अगस्त 2025 से जून 2026 के बीच अलग-अलग माध्यमों से ₹2.27 करोड़ वसूले गए, जिनमें नकद, बैंक ट्रांसफर और क्रेडिट कार्ड लेनदेन शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पूरी ठगी के लिए एक सुनियोजित कहानी तैयार की थी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संपर्क, कानूनी प्रक्रिया और फाइल मूवमेंट जैसी बातों का हवाला देकर लगातार “एडवांस पेमेंट” की मांग की जाती थी। हालांकि वास्तविकता में कोई रिकवरी प्रक्रिया शुरू ही नहीं की गई थी।
EOW अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने लगातार मानसिक दबाव और भरोसा बनाए रखने की रणनीति अपनाई। पीड़ित को बार-बार यह कहा गया कि रिकवरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिससे वह लगातार पैसे भेजता रहा।
जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन और वित्तीय दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस पूरे लेनदेन में “म्यूल बैंक अकाउंट्स” का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया, ताकि पैसों के असली स्रोत और गंतव्य को छिपाया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि इन खातों के जरिए रकम को कई स्तरों पर घुमाया गया और अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर ट्रेल को धुंधला किया गया। अब जांच एजेंसियां इस पैसे के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी हैं।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
पुलिस को यह भी शक है कि यह मामला किसी बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। आरोपियों के कुछ विदेशी संपर्कों की भी जांच की जा रही है, जिनसे निर्देश मिलने की आशंका जताई गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में बैंकिंग चैनल, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर लेनदेन को बेहद जटिल बना दिया जाता है, जिससे जांच में समय लगता है। इसी पैटर्न को इस केस में भी अपनाया गया है।
जांच टीम अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इसी तरीके से अन्य राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाया गया है। शुरुआती संकेतों के अनुसार, यह एक संगठित फ्रॉड सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है।
बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और चैट रिकॉर्ड्स से कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है, जो पूरे नेटवर्क की संरचना को उजागर कर सकते हैं। फिलहाल डिजिटल फॉरेंसिक टीम डेटा विश्लेषण में जुटी हुई है।
EOW ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर संदिग्ध खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, ताकि आगे और पैसे की हेराफेरी रोकी जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं, क्योंकि जांच अभी विस्तृत स्तर पर जारी है। यह केस साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते संगठित स्वरूप को दर्शाता है, जिसमें तकनीक का दुरुपयोग कर आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि विदेश से पैसे लौटाने या बड़े निवेश की रिकवरी का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और बिना कानूनी पुष्टि के कोई भुगतान न करें।
