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Home»राष्ट्रीय»बिहार टेंडर घोटाले में बड़ा एक्शन: रिशुश्री के सहयोगी संतोष गिरफ्तार, जांच एजेंसियों की रडार पर कई अधिकारी
राष्ट्रीय

बिहार टेंडर घोटाले में बड़ा एक्शन: रिशुश्री के सहयोगी संतोष गिरफ्तार, जांच एजेंसियों की रडार पर कई अधिकारी

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJune 5, 2026No Comments3 Mins Read
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विशेष निगरानी इकाई की पटना में कार्रवाई से माफिया नेटवर्क पर शिकंजा, दो IAS अधिकारियों के निलंबन के बाद जांच तेज
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पटना। बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए टेंडर माफिया रिशुश्री के करीबी सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी पटना से की गई, जिसके बाद पूरे घोटाले के नेटवर्क की परतें और खुलने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले इस मामले में दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि कई अन्य अधिकारी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, संतोष कुमार लंबे समय से रिशुश्री के कारोबारी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और उसकी कई कंपनियों के संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था। बताया गया कि वह ‘मातृस्वा’ नामक कंपनी में निदेशक के रूप में काम कर रहा था, जो टेंडर प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों और हेरफेर के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।

सूत्रों के मुताबिक, रिशुश्री ने अलग-अलग नामों से कई कंपनियां बनाई थीं, जिनमें रिलायबल इंफ्रा और मातृस्वा प्रमुख हैं। इन कंपनियों के जरिए सरकारी टेंडरों में कथित तौर पर हेरफेर कर अनुचित लाभ कमाने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि इन कंपनियों का संचालन सुपौल से किया जा रहा था, जहां से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित किया जाता था।

अधिकारियों के अनुसार, संतोष कुमार केवल एक सहयोगी नहीं बल्कि इस पूरे सिस्टम का एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। वह न केवल कंपनी के संचालन में शामिल था, बल्कि टेंडर से जुड़े निर्णयों और दस्तावेजी प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाता था।

मामले की जांच में यह भी सामने आया है कि रिशुश्री की पत्नी ऋतंभरा भी कंपनियों में निदेशक के रूप में शामिल थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से सरकारी टेंडरों में हेरफेर करने और ठेके हासिल करने के लिए बनाया गया था।

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इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच भी जारी है, जिसमें कई वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध ट्रांजैक्शन के सुराग मिले हैं। एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क में प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों की भूमिका भी हो सकती है।

जांच के दौरान सामने आया है कि रिशुश्री के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनमें कुछ संपर्कों को “IAS भैया” जैसे नामों से सेव किया गया था। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुट गई हैं कि क्या इन अधिकारियों का संपर्क केवल व्यक्तिगत था या फिर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने में उनकी कोई भूमिका रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा अब तेजी से बढ़ाया जा रहा है और टेंडर आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की गहन समीक्षा की जा रही है। एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि किन परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी की गई और किन स्तरों पर निर्णय प्रभावित हुए।

अधिकारियों ने बताया कि संतोष कुमार से पूछताछ में कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है, जो पूरे टेंडर नेटवर्क और उसके वित्तीय ढांचे को उजागर कर सकते हैं। जांच टीम अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या यह घोटाला केवल बिहार तक सीमित था या इसके तार अन्य राज्यों तक फैले हुए हैं।

इस मामले में पहले ही दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है, जिन पर कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप हैं। अब अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए सरकारी सिस्टम को प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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