लुधियाना में एक बड़े ट्रैवल फ्रॉड मामले में प्रशासन ने पीड़ितों को बड़ी राहत दी है। अधिकारियों ने ₹70.77 लाख की राशि 11 पीड़ितों को वापस दिलाई है। यह रकम उस कुल ₹1.07 करोड़ से बरामद की गई थी, जिसे कथित ट्रैवल एजेंटों से जब्त किया गया था। यह कार्रवाई कोर्ट के निर्देशों के तहत की गई, जबकि बाकी पीड़ितों को भी जल्द मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया जारी है।
मामला वर्ष 2024 की एक शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दो ट्रैवल एजेंट, जो कथित रूप से भाई-बहन हैं, लोगों को विदेश में नौकरी और इमिग्रेशन का झांसा देकर ठगते थे। आरोप है कि दोनों ने वीजा, वर्क परमिट और विदेश में प्लेसमेंट के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूली और उन्हें फर्जी आश्वासनों के जरिए गुमराह किया।
जांच में सामने आया कि शुरुआत में पीड़ितों को कम निवेश और आकर्षक विदेशी नौकरी के ऑफर दिए गए। जैसे-जैसे भरोसा बढ़ता गया, उनसे कई किश्तों में बड़ी रकम ली जाती रही। कई परिवारों ने अपनी जीवनभर की बचत इस उम्मीद में लगा दी कि उनके परिजन विदेश जाकर बेहतर भविष्य बना सकेंगे।
पुलिस जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज, नकली नियुक्ति पत्र और गलत संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लिया। इसी कारण यह धोखाधड़ी लंबे समय तक चलती रही और कई लोग इसका शिकार बनते रहे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कई पीड़ितों की शिकायतें एक साथ सामने आईं। इसके बाद जांच एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन का पता लगाया और ₹1.07 करोड़ से अधिक की राशि बरामद की। बाद में इस रकम को कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट की निगरानी में पीड़ितों के बीच वितरित करने का आदेश दिया गया।
प्रक्रिया के तहत बरामद राशि को पीड़ितों के दस्तावेजों और नुकसान के आधार पर बांटा गया। सभी दावों की जांच कई चरणों में की गई ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सही लोगों को ही मुआवजा मिले। इसी प्रक्रिया के पहले चरण में ₹70.77 लाख की राशि 11 पीड़ितों को लौटाई गई है।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
अधिकारियों के अनुसार, बाकी छह पीड़ितों को भी दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनका हिस्सा दिया जाएगा। शेष राशि का निपटान अभी जारी है और पूरा मुआवजा जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
जांच एजेंसियों ने यह भी बताया कि ऐसे फ्रॉड अक्सर संगठित नेटवर्क के जरिए किए जाते हैं, जिसमें कई बैंक खातों और अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल कर पैसे को ट्रैक करना मुश्किल बना दिया जाता है। डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि विदेश में नौकरी या इमिग्रेशन के नाम पर किसी भी प्रकार के ऑफर को स्वीकार करने से पहले पूरी तरह जांच करें और अधिकृत एजेंसियों से ही संपर्क करें। ठग अक्सर भावनात्मक भरोसा और जल्दी नौकरी दिलाने के लालच का इस्तेमाल करते हैं।
इस मामले ने ट्रैवल और भर्ती एजेंटों पर सख्त निगरानी की जरूरत को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।
फिलहाल पीड़ितों ने आंशिक राशि मिलने पर राहत जताई है, लेकिन उनका कहना है कि पूरी रकम वापस मिलने तक उन्हें न्याय अधूरा लगेगा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बाकी मुआवजा भी जल्द दिया जाएगा।
जांच अभी जारी है और माना जा रहा है कि आगे इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं।
