डिंडीगुल: तमिलनाडु के बहुचर्चित पालनी मंदिर भूमि घोटाले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच-क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CB-CID) ने गुरुवार को निलंबित सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, उन्हें डिंडीगुल जिले के कोडाइकनाल क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद की गई है।
यह मामला पालनी स्थित धंडपानी स्वामी मठ की लगभग 1.40 एकड़ भूमि के कथित अवैध बिक्री से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब ₹100 करोड़ बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि धार्मिक संस्था की इस बहुमूल्य संपत्ति का पंजीकरण नियमों और विभागीय आपत्तियों की अनदेखी करते हुए निजी व्यक्तियों के पक्ष में कर दिया गया।
मामले की शुरुआत 13 जुलाई को हुई, जब तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने पालनी अडीवरम पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि मठ की भूमि को दो निजी व्यक्तियों के नाम बेच दिया गया, जबकि विभाग ने इस प्रस्ताव पर पहले ही कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
शिकायत के अनुसार, यह भूमि 25 सितंबर 2025 से आधिकारिक रूप से HR&CE विभाग के नियंत्रण में थी और पालनी स्थित भगवान दंडायुधपाणि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी पार्किंग स्थल के रूप में उपयोग की जा रही थी। इसके बावजूद भूमि के स्वामित्व और पंजीकरण से जुड़े नियमों का कथित रूप से उल्लंघन किया गया।
जांच में यह आरोप भी सामने आया कि धंडपानी स्वामी मठ के पूर्व ट्रस्टी धंडपानी अय्या के रिश्तेदार डी. मुरुगदास ने तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन के साथ मिलकर इस भूमि के पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। आरोपों के सामने आने के बाद पंजीकरण विभाग ने जस्टिन मणिकंदन को निलंबित कर दिया था। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CB-CID को सौंप दी गई।
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CB-CID ने 16 जुलाई को अवैध भूमि पंजीकरण के संबंध में औपचारिक जांच दर्ज की। इसके बाद जांच में तेजी लाते हुए 29 जुलाई को चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें कथित खरीदार के. वेल्लईथुरई और सेतुपति, कथित विक्रेता डी. मुरुगदास तथा सौदे के बिचौलिए एस. अनवरदीन शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिकाओं की विस्तार से जांच की जा रही है और दस्तावेजों के साथ-साथ वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ी। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने 17 जुलाई को जस्टिन मणिकंदन को अंतरिम राहत देते हुए 4 अगस्त तक अंतरिम जमानत प्रदान की थी। हालांकि, राहत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की, जिसे बुधवार को अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद CB-CID ने उनकी तलाश तेज कर दी और गुरुवार को उन्हें कोडाइकनाल के सिल्वर कैस्केड फॉल्स क्षेत्र के पास से गिरफ्तार कर लिया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में सरकारी अभिलेखों, पंजीकरण प्रक्रिया और भूमि हस्तांतरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि कथित अनियमितताओं में और किन लोगों की भूमिका रही तथा क्या इस पूरे प्रकरण में किसी संगठित नेटवर्क या अन्य सरकारी अधिकारियों की भी संलिप्तता थी।
CB-CID अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। यदि जांच के दौरान नए साक्ष्य सामने आते हैं तो इस बहुचर्चित मंदिर भूमि घोटाले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों की सुरक्षा और उनके पंजीकरण की प्रक्रिया पर भी इस मामले के बाद नए सिरे से सवाल खड़े हो गए हैं।
